Description
सूर्य जाप भगवान सूर्य को समर्पित मंत्र का जप होता है, जो सूर्य के शुभ प्रभावों को प्राप्त करने और उसके दोषों को दूर करने में सहायक होता है। सूर्य जाप (28000 जप) के लिए एक प्रमुख मंत्र है:
“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥”
(ओं ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः)
इस मंत्र को ध्यान से जपने से सूर्य के शुभ प्रभावों को प्राप्त किया जा सकता है और उसके दोषों को निवारण किया जा सकता है। जाप की प्रक्रिया में ध्यान और श्रद्धा का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। इस मंत्र को अधिकांशत: १०८ बार या इसके गुणाकार में जपा जाता है। इसे दैनिक आध्यात्मिक अभ्यास का भाग बनाया जा सकता है, या यथासंभव गुरु या पंडित के निर्देशन में किया जा सकता है। कलियुग में भगवान सूर्य के जप (28000 जप) करने से महापुण्य मिलता है।
- संकल्प (Sankalp)
- सूर्य मंत्र जाप (Surya Mantra Jaap)
- सूर्य शांति हवन (Surya Shanti Hawan)
- पंडित जी को दक्षिणा (Dakshina to Pandit Ji)
जाप संख्या : 28000
पंडित जी की संख्या : 5
जाप पूरा करने का समय: 1 दिन
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**पूजा अनुष्ठान विद्वान पुजारियों द्वारा वैदिक अनुष्ठानों के अनुसार विधि विधान से किए जाते हैं।







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