केतु जाप (17000 जप)

Original price was: ₹7,500.00.Current price is: ₹4,100.00.

क्या आपकी कुंडली में केतु ग्रह अशुभ या नीच स्थिति में हैं, राहु-सूर्य-चंद्र के साथ युति बनाकर ग्रहण या केतु दोष निर्मित कर रहे हैं, अथवा आप अचानक आने वाली रुकावटों, अकारण भय, भ्रम (Confusion), डिप्रेशन, मानसिक अस्थिरता, त्वचा/नसों के विकार, या करियर व आध्यात्मिक जीवन में दिशाहीनता का सामना कर रहे हैं? ज्योतिष में केतु को मोक्ष, ज्ञान, सूक्ष्म बुद्धि, तंत्र और विवेक का कारक माना गया है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 वेदज्ञ कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में 17,000 केतु बीज मंत्रों (ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः…

Description

केतु मंत्र जाप (17,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, केतु ग्रह मोक्ष, आध्यात्मिक चेतना, सूक्ष्म बुद्धि और कर्मिक फल प्रदान करने वाले छाया ग्रह हैं। जब जन्मकुंडली में केतु अशुभ स्थिति में होते हैं या राहु-केतु का प्रभाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो व्यक्ति का मन भ्रमित रहने लगता है, अकारण भय और चिंता घेर लेती है, तथा बने-बनाये काम अचानक बिगड़ने लगते हैं। व्यक्ति को स्वास्थ्य बाधाओं और निर्णय लेने में असमर्थता का सामना करना पड़ता है। उज्जैन स्थित अति पवित्र सिद्धवट घाट पर 5 विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से 17,000 केतु बीज मंत्रों का सस्वर जाप और शांति महाहवन कराने से केतु देव का कोप शांत होता है, मानसिक स्पष्टता आती है और जीवन के कर्मिक बंधन व संकट दूर होते हैं।

कुंडली में अशुभ केतु के मुख्य लक्षण:

  • मानसिक अस्थिरता, निर्णय शक्ति की कमी, दिशा भ्रम और अकारण डर या चिंता रहना।
  • कार्यों में अचानक संकट, रुकावटें आना और जीवन में लगातार अनिश्चितता बना रहना।
  • त्वचा रोग, नसों के विकार, या अज्ञात शारीरिक कष्ट जिनका निदान आसानी से न हो।
  • आध्यात्मिक मार्ग से भटकाव, अवांछित इच्छाएं बढ़ना और वैराग्य या डिप्रेशन की स्थिति।
  • गुप्त शत्रुओं का भय, अकारण क्लेश और पारिवारिक जीवन में अलगाव महसूस होना।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन काल गणना का मुख्य केंद्र और कालों के देवता भगवान महाकाल की पावन नगरी है। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन सिद्ध पीठ है, जहाँ की गई पूजा का प्रभाव अत्यंत तीव्र होता है:

  • सिद्धवट कल्पवृक्ष पीठ: सिद्धवट के जाग्रत प्रांगण (अक्षय वट) के नीचे की गई पूजा, जाप और दान से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और ग्रह दोषों का शमन होता है।
  • 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा जप: उज्जैन के उच्च कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में सस्वर, लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण के साथ 17,000 केतु मंत्र जप विधान।
  • शास्त्रोक्त दान विधान: अनुष्ठान के उपरांत केतु ग्रह से संबंधित वस्तुओं (काले तिल, कंबल, दोरंगा वस्त्र आदि) का विधिवत दान।

अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के आधार पर व्यक्तिगत केतु दोष निवारण संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मंडल का विधि-विधान से पूजन।
  3. केतु देव आवाहन व ध्यान: भगवान केतु का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
  4. 17,000 केतु मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा “ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः” बीज मंत्र का 17,000 बार सस्वर पाठ।
  5. केतु शांति महाहवन (Havan): कुशा, तिल, घी व विशेष समिधाओं से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
  6. दान व पूर्ण आहुति: केतु ग्रह की प्रसन्नता हेतु वस्त्र व अन्न दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • मानसिक एकाग्रता व अंतर्ज्ञान: मन का भ्रम, डिप्रेशन और अनिश्चितता दूर होकर एकाग्रता, आत्मबल और अंतर्ज्ञान मजबूत होता है।
  • गूढ़ विद्याओं में सफलता: ज्योतिष, तंत्र, शोध, लेखन और गुप्त विद्याओं में रुचि व दक्षता बढ़ती है।
  • अचानक आए संकटों से सुरक्षा: केतु दोष से उत्पन्न बाधाएं, दुर्घटनाएं और अचानक आने वाले संकट दूर होते हैं।
  • आध्यात्मिक प्रगति: मन शांत और विवेकपूर्ण बनता है, कर्मिक बंधन कम होते हैं तथा आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
  • आरोग्यता व शांति: अज्ञात बीमारियों, त्वचा रोगों और मानसिक तनाव में शीघ्र राहत मिलती है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या केतु मंत्र जाप ऑनलाइन कराना संभव है?
उत्तर: हाँ, यह पूजा पूरी तरह ऑनलाइन कराई जा सकती है। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन में आपके नाम और गोत्र का संकल्प लेकर पूरी विधि से अनुष्ठान संपन्न करेंगे।

Q2. क्या मुझे पूजा के समय उपस्थित रहना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में भी पंडित जी आपके जन्म विवरण से संकल्प लेकर अनुष्ठान करते हैं, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Q3. क्या पूजा के बाद फोटो, वीडियो या रिपोर्ट मिलती है?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको पूजा फोटो, संकल्प वीडियो, हवन क्लिप और अनुष्ठान रिपोर्ट भेजी जाती है। साथ ही सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी आपके पते पर कूरियर की जाती है।

Q4. यह जाप कितने समय में पूरा होता है?
उत्तर: यह अनुष्ठान 1 दिन में 5 विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पूरा किया जाता है।

Q5. कौन सा दिन केतु पूजा के लिए शुभ माना जाता है?
उत्तर: मंगलवार और शनिवार का दिन केतु शांति पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है, परंतु उज्जैन के सिद्धवट घाट पर यह पूजा प्रतिदिन कराई जा सकती है।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “केतु जाप (17000 जप)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like…

Related products