शनि जाप (23000 जप)

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क्या आपकी कुंडली में शनि देव की साढ़े साती, ढैय्या, महादशा या अंतर्दशा चल रही है, जिसके कारण निरंतर कार्यों में अत्यधिक विलंब, नौकरी व व्यवसाय में अस्थिरता, आर्थिक तंगी, कोर्ट-कचहरी के विवाद, अकारण भय अथवा शारीरिक व मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है? वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का ग्रह माना गया है। जब शनि देव की अशुभ दृष्टि या दशा प्रभाव में होती है, तो व्यक्ति का जीवन संघर्षों से घिर जाता है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 वेदज्ञ कर्मकांडी आचार्यों…

Description

शनि मंत्र जाप (23,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, सूर्यपुत्र शनि देव नवग्रहों में कर्मफलदाता और न्यायप्रिय ग्रह माने गए हैं। शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जब जन्मकुंडली में शनि अशुभ भावों में स्थित हों, नीच राशि (मेष) में हों, या जातक पर शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या का प्रभाव चल रहा हो, तो जीवन की गति अत्यंत धीमी हो जाती है। अथक परिश्रम के बाद भी उचित परिणाम नहीं मिलते, अचानक नुकसान होते हैं और मानसिक तनाव बढ़ता है। उज्जैन स्थित सिद्धवट घाट पर 5 कर्मकांडी आचार्यों द्वारा शास्त्रीय रीति से 23,000 शनि मंत्रों का सस्वर जाप और शांति महाहवन कराने से शनि देव की क्रूर दृष्टि शांत होती है, कर्मिक कष्ट हल्के होते हैं और जीवन में प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।

कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती या ढैय्या के मुख्य लक्षण:

  • बने-बनाये कामों में अंतिम समय पर अकारण देरी, बाधाएं और असफलता मिलना।
  • नौकरी में पदोन्नति रुकना, नौकरी छूटने का भय या व्यापार में निरंतर वित्तीय घाटा होना।
  • अत्यधिक मानसिक बेचैनी, अवसाद, आलस्य और पैरों, जोड़ों या नसों से संबंधित शारीरिक कष्ट।
  • कानूनी मामलों, कोर्ट-कचहरी के विवादों और शत्रुओं द्वारा अनचाही परेशानियाँ।
  • ऋण (कर्ज) का बढ़ते जाना और जीवन में अचानक अप्रत्याशित संकटों का आना।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन (अवंतिका) कर्क रेखा पर स्थित संपूर्ण विश्व के काल गणना का मुख्य केंद्र है, जहाँ भगवान शिव स्वयं समय के अधिपति ‘महाकाल’ के रूप में विराजित हैं। सप्तपुरियों में श्रेष्ठ इस तीर्थ में शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट (अक्षय कल्पवृक्ष) एक अलौकिक सिद्ध पीठ है:

  • अक्षय कल्पवृक्ष पीठ: स्कंद पुराण के अनुसार, सिद्धवट के पावन प्रांगण में की गई शनि शांति पूजा, जाप और दान का फल अनंत गुना होकर शीघ्र फलदायी होता है।
  • 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा जप: उज्जैन के उच्च कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में शास्त्रीय मर्यादा, शुद्ध वैदिक उच्चारण और लयबद्धता के साथ 23,000 शनि मंत्र जाप का संपादन।
  • शास्त्रोक्त दान विधान: अनुष्ठान के उपरांत शनि देव की प्रसन्नता हेतु काले तिल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, उड़द दाल व लोहे की वस्तुओं का विधिवत दान।

अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के आधार पर व्यक्तिगत शनि दोष/साढ़े साती निवारण संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मण्डल का विधि-विधान से पूजन।
  3. भगवान शनैश्चर आवाहन व ध्यान: कर्मफलदाता शनि देव का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
  4. 23,000 शनि मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा 1 दिन में “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥” अथवा वैदिक शनि मंत्र का सस्वर 23,000 बार पाठ।
  5. शनि शांति महाहवन (Havan): शमी (खेजड़ी) की समिधा, काले तिल, घी व विशेष हविष्य से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
  6. दान व पूर्ण आहुति: शनि देव की प्रसन्नता हेतु काली वस्तुओं का दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • साढ़े साती व ढैय्या से राहत: शनि की साढ़े साती, ढैय्या और महादशा के दुष्परिणाम अत्यंत शांत और नियंत्रित होते हैं।
  • करियर व व्यवसाय में स्थायित्व: नौकरी में रुकावटें दूर होती हैं, कार्यक्षेत्र में पद-प्रतिष्ठा और निरंतर प्रगति मिलती है।
  • मानसिक शांति व आत्मबल: मानसिक बेचैनी, अनजाना भय और तनाव समाप्त होकर मन स्थिर व शांत होता है।
  • कर्मिक कष्टों से मुक्ति: अनचाहे संकट, अचानक होने वाली धन हानि और कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत मिलती है।
  • पारिवारिक सुख व सुरक्षा: घर-परिवार में क्लेश दूर होकर शांति, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का संचार होता है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि (Date of Birth)
  4. जन्म समय (Time of Birth)
  5. जन्म स्थान (Place of Birth)
  6. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या यह पूजा ऑनलाइन करवाई जा सकती है?
उत्तर: हाँ, यह अनुष्ठान पूरी तरह से ऑनलाइन करवाया जा सकता है। आपको वीडियो कॉल के माध्यम से लाइव अनुष्ठान में जोड़ा जाएगा।

Q2. क्या पूजा में मेरी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, आपकी उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। विद्वान पंडित जी आपके नाम, गोत्र और जन्म विवरण से संकल्प लेकर पूरी विधि से जाप और अनुष्ठान संपन्न करेंगे।

Q3. क्या पूजा के बाद कोई प्रमाण, फोटो या प्रसादी मिलती है?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको अनुष्ठान के फोटो, संकल्प व हवन की वीडियो क्लिप, पूजा रिपोर्ट और सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी कूरियर द्वारा भेजी जाती है।

Q4. यह पूजा करने का सबसे शुभ समय कौन सा है?
उत्तर: शनिवार का दिन और शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) विशेष शुभ माने जाते हैं। पंडित जी आपकी कुंडली देखकर सर्वश्रेष्ठ तिथि सुनिश्चित करते हैं।

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