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राहु मंत्र जाप (72,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)
वैदिक ज्योतिष और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, जब कुंडली में राहु ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, तो जीवन में ‘राहु दोष’ का निर्माण होता है। छाया ग्रह राहु का नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में अनियंत्रित इच्छाएं, भ्रम, अवसाद, व्यसन और अकारण डर पैदा करता है। इससे बने बनाए काम अंतिम समय पर बिगड़ने लगते हैं और गुप्त शत्रुओं की चालें सफल होने लगती हैं। उज्जैन स्थित सिद्धवट घाट पर 5 आचार्यों द्वारा विधि-विधान से 72,000 राहु मंत्रों का जाप और शांति हवन कराने से राहु देव का कोप शांत होता है, हानिकारक दृष्टि शुभ प्रभाव में बदलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा व स्थिरता आती है।
कुंडली में राहु दोष के मुख्य लक्षण:
- मानसिक भ्रम (Confusion), निर्णय न ले पाना, अकारण भय, घबराहट और अनिद्रा।
- व्यापार, शेयर मार्केट या निवेश में अचानक बड़ा वित्तीय घाटा होना।
- गुप्त शत्रुओं द्वारा षड्यंत्र, धोखाधड़ी, कोर्ट केस या सामाजिक प्रतिष्ठा का हनन।
- त्वचा रोग, नसों से जुड़ी बीमारियां, या अकारण शरीर में सुस्ती व नकारात्मकता रहना।
- पारिवारिक कलह, वैवाहिक जीवन में अविश्वास और संतान सुख या नौकरी में अड़चनें आना।
उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?
उज्जैन काल गणना का केंद्र और भगवान महाकाल की मोक्षदायिनी नगरी है। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट राहु-केतु और नवग्रह शांति के लिए अत्यंत पवित्र शक्तिपीठ माना गया है:
- अक्षय कल्पवृक्ष पीठ: पवित्र शिप्रा तट स्थित सिद्धवट के नीचे की गई पूजा, जाप और दान का फल अनंत गुना होकर शीघ्र प्राप्त होता है।
- 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा जप: उज्जैन के कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 2 दिनों तक सस्वर, लयबद्ध और शास्त्रीय मर्यादा से 72,000 मंत्र जप विधान।
- शास्त्रोक्त दान विधान: पूजा के उपरांत राहु से संबंधित वस्तुओं (काला तिल, उड़द, नीला वस्त्र आदि) का विधिवत दान।
अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)
- शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के साथ राहु दोष निवारण हेतु संकल्प।
- गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मंडल की स्थापना।
- राहु देव आवाहन व ध्यान: राहु ग्रह का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
- 72,000 राहु मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा 2 दिनों में “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” बीज मंत्र का सस्वर पाठ।
- राहु शांति महाहवन (Havan): विशेष समिधाओं, सरसों तेल, काले तिल, उड़द व घी से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
- दान व पूर्ण आहुति: राहु ग्रह की संतुष्टि हेतु नीला वस्त्र, तिल, उड़द का दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।
इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)
- मानसिक एकाग्रता व स्पष्टता: भ्रम, अवसाद और अज्ञात भय समाप्त होकर मन में शांति व दृढ़ता आती है।
- शत्रु बाधा व षड्यंत्र से मुक्ति: गुप्त शत्रुओं का प्रभाव निष्प्रभावी होता है और कार्यों में विजय मिलती है।
- आर्थिक व व्यावसायिक स्थिरता: अचानक होने वाली धन हानि पर रोक लगती है और करियर व व्यापार में नए अवसर प्राप्त होते हैं।
- पारिवारिक सुख व शांति: घर में चल रहे अकारण क्लेश समाप्त होते हैं और स्वास्थ्य व संतान संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।
- राहु की शुभता: राहु का अशुभ प्रभाव समाप्त होकर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगते हैं।
पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):
- पूरा नाम (Full Name)
- पिता का नाम (Father’s Name)
- जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
- गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)
नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या राहु मंत्र जाप ऑनलाइन बुक किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आप घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन में आपके नाम-गोत्र का संकल्प लेकर पूरी विधि से जाप संपन्न करेंगे।
Q2. क्या मुझे पूजा के समय उज्जैन में उपस्थित रहना अनिवार्य है?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में भी पंडित जी आपके नाम और गोत्र का संकल्प लेकर अनुष्ठान करते हैं, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होता है।
Q3. क्या पूजा पूर्ण होने के बाद कोई प्रमाण या फोटो/वीडियो मिलेगा?
उत्तर: हाँ, पूजा संपन्न होने के बाद आपको अनुष्ठान के फोटो/वीडियो रिपोर्ट और सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी आपके पते पर भेजी जाएगी।
Q4. राहु मंत्र जाप कराने के लिए सबसे शुभ दिन कौन सा है?
उत्तर: शनिवार का दिन और राहु काल का समय राहु शांति मंत्र जाप एवं अनुष्ठान के लिए सर्वाधिक श्रेष्ठ माना जाता है।








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