राहु जाप (18000 जप)

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क्या आप राहु महादशा/अंतरदशा, कालसर्प दोष, अचानक आने वाले वित्तीय संकट, अज्ञात भय, भ्रम (Confusion), शत्रुओं के गुप्त षड्यंत्र, या तंत्र-नकारात्मक बाधाओं से परेशान हैं? वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक माना गया है। अवंतिका नगरी (उज्जैन) के पवित्र शिप्रा तट स्थित सिद्ध पीठ सिद्धवट घाट पर 5 विद्वान आचार्यों द्वारा राहु बीज मंत्र (ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥) का 18,000 सस्वर जाप, राहु शांति महाहवन एवं आपके नाम-गोत्र संकल्प के साथ यह अनुष्ठान कराएं। घर बैठे ऑनलाइन बुक करें और शत्रु नाश, मानसिक स्पष्टता व राहु दोषों से मुक्ति…

Description

राहु मंत्र (18,000) जाप अनुष्ठान क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिषशास्त्र और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, जब जन्म कुंडली में राहु नीच या पीड़ित स्थिति में हो, गुरु-राहु का ‘गुरु चांडाल दोष’ बना रहा हो, सूर्य/चंद्र के साथ ‘ग्रहण दोष’ बना रहा हो, या ‘कालसर्प दोष’ निर्मित हो, तो जीवन में अचानक अनचाही परेशानियाँ बढ़ जाती हैं। राहु के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति सही-गलत का निर्णय नहीं ले पाता और गुप्त शत्रु हावी होने लगते हैं। कलियुग में भगवान राहु के सिद्ध बीज मंत्रों का 18,000 की प्रामाणिक संख्या में जाप कराने से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन होता है, शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता व प्रगति का मार्ग खुलता है।

राहु के पीड़ित या अशुभ होने के मुख्य लक्षण:

  • जीवन में अचानक धन हानि, शेयर बाजार या सट्टे में बड़ा नुकसान होना।
  • अज्ञात भय, बुरे सपने, भ्रम की स्थिति और अनिद्रा (Sleep issues) की समस्या।
  • गुप्त शत्रुओं द्वारा षड्यंत्र, झूठे आरोप या नशा/गलत संगत की ओर रुझान।
  • कालसर्प दोष, गुरु चांडाल दोष या ग्रहण दोष के कारण बनते हुए कामों का बिगड़ना।
  • घर में नकारात्मक ऊर्जा, अचानक त्वचा रोग या स्नायु तंत्र (Nerves) से जुड़ी बीमारियां।

उज्जैन सिद्धवट घाट पर ही यह पूजा कराने का महात्म्य

अवंतिका (उज्जैन) महाकाल की नगरी है और यहाँ शिप्रा तट पर स्थित सिद्धवट घाट राहु-केतु और नवग्रह शांति के लिए विश्वविख्यात है:

  • सिद्धवट कल्पवृक्ष पीठ: स्कंद पुराण के अनुसार, सिद्धवट घाट पर किया गया जाप और दान अक्षय फल प्रदान करता है तथा छाया ग्रहों के कष्टों को शीघ्र शांत करता है।
  • 5 विद्वान आचार्यों का अनुष्ठान: 5 कर्मकांडी वेदज्ञ पंडितों द्वारा पूर्ण शुद्धता और एकाग्रता के साथ 18,000 जाप 1 दिन में संपन्न किया जाता है।
  • पूर्ण तांत्रिक व वैदिक विधान: जाप के साथ-साथ दुर्वा, काले तिल, नीले पुष्प व विशेष समिधाओं द्वारा राहु शांति हवन किया जाता है।

राहु जाप अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. विशेष संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र का उच्चारण कर अनुष्ठान का शास्त्रीय संकल्प।
  2. राहु देव आवाहन व पूजन: राहु यंत्र एवं सर्वतोभद्र मंडल पर भगवान राहु का ध्यान, आवाहन व षोडशोपचार पूजन।
  3. 18,000 राहु मंत्र जाप (Mantra Chanting): 5 विद्वान आचार्यों द्वारा “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥” बीज मंत्र का 18,000 बार सस्वर शुद्ध पाठ।
  4. राहु शांति महाहवन (Rahu Shanti Havan): मंत्र जाप पूर्ण होने पर विशेष द्रव्यों, सरसों, तिल व घृत से राहु शांति हवन।
  5. राहु दान व पूर्णाहुति: अनुष्ठान की पूर्णता हेतु राहु संबंधी वस्तुओं (सीसा, उड़द, काला वस्त्र आदि) का दान एवं विप्र दक्षिणा अर्पण।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • शत्रु नाश व षड्यंत्र से सुरक्षा: गुप्त शत्रुओं की चालें निष्प्रभावी होती हैं और विरोधियों पर विजय मिलती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा व तंत्र बाधा से मुक्ति: घर व मन से बुरी शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है और सुरक्षा चक्र बनता है।
  • मानसिक स्पष्टता व तनावमुक्ति: भ्रम और अनिद्रा दूर होकर मन में सकारात्मक ऊर्जा व स्पष्ट सोच आती है।
  • अचानक नुकसान पर रोक: शेयर मार्केट, बिजनेस या सट्टेबाजी में होने वाले अचानक वित्तीय घाटों से बचाव होता है।
  • राहु/कालसर्प दोष शांति: राहु की महादशा, अंतरदशा और कुंडली के दोष शांत होकर शुभ फल देने लगते हैं।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात पूजा की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. राहु मंत्र (18,000) जाप किसे करवाना चाहिए?
उत्तर: जिन्हें राहु की महादशा/अंतरदशा चल रही हो, कालसर्प दोष या ग्रहण दोष हो, अचानक धन हानि हो रही हो, या जो शत्रुओं व नकारात्मक ऊर्जा से परेशान हों, उन्हें यह अनुष्ठान कराना चाहिए।

Q2. क्या मुझे इस अनुष्ठान के लिए उज्जैन सिद्धवट घाट पर उपस्थित रहना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते हैं तो हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट पर आपके नाम और गोत्र का व्यक्तिगत संकल्प लेकर आपकी ओर से पूरी विधि से अनुष्ठान संपन्न करेंगे।

Q3. क्या पूजा का फोटो और वीडियो प्रमाण मिलेगा?
उत्तर: हाँ, आपके नाम से लिए गए संकल्प, जाप एवं हवन के फोटो और वीडियो प्रमाण आपको व्हाट्सएप पर भेजे जाएंगे।

Q4. पूजा के बाद प्रसाद में क्या प्राप्त होगा?
उत्तर: अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद सिद्धवट घाट से अभिमंत्रित राहु प्रसादी, रक्षासूत्र और हवन भस्म आपके दिए गए पते पर कूरियर द्वारा भेजी जाएगी।

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