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मंगल मंत्र (40,000) जाप अनुष्ठान क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब जन्म कुंडली के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल ग्रह स्थित होता है, तो ‘मांगलिक दोष’ (Manglik Dosh) का निर्माण होता है। मंगल की उग्रता के कारण व्यक्ति को विवाह योग्य आयु होने पर भी सुयोग्य जीवनसाथी मिलने में बाधा आती है, या विवाह के पश्चात दांपत्य सुख में निरंतर बाधा, वैमनस्य और विवाद बना रहता है। इसके अतिरिक्त मंगल के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति अत्यधिक क्रोधी, निर्णय लेने में अधैर्यवान, दुर्घटनाओं का शिकार या रक्त विकार से पीड़ित हो सकता है। शास्त्रों के अनुसार, 40,000 की संख्या में मंगल बीज मंत्रों का जाप और तदोपरांत दशांश हवन कराने से मंगल ग्रह का उग्र प्रभाव शांत होता है तथा वह शुभ फल प्रदान करने लगता है।
मांगलिक दोष व मंगल पीड़ित होने के मुख्य लक्षण:
- विवाह के रिश्तों का बार-बार अंतिम क्षणों में टूट जाना या अति-विलंब होना।
- पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक क्रोध, मानसिक दूरी व वैवाहिक कलह।
- रक्त संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप (High BP), चोट या शल्यचिकित्सा (Surgery) का योग।
- भूमि, मकान या अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय में अड़चनें एवं कानूनी विवाद।
- करियर में नेतृत्व क्षमता की कमी, अत्यधिक कर्ज और शत्रुओं का भय।
उज्जैन सिद्धवट घाट पर ही यह पूजा कराने का महात्म्य
अवंतिका (उज्जैन) को अनादि काल से ही मंगल देव की प्राकट्य स्थली और दोष निवारण का महा-सिद्ध क्षेत्र माना गया है:
- स्कंद पुराणोक्त सिद्धवट क्षेत्र: शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट (पवित्र वटवृक्ष) के नीचे किया गया जप और हवन अनंत गुना फल प्रदान करता है।
- शास्त्रीय विधान व शुद्ध संकल्प: 5 अनुभवी वैदिक आचार्यों द्वारा पूर्ण विधि-विधान, शुद्ध उच्चारण और एक दिन के भीतर 40,000 जाप संख्या को शास्त्रीय परंपरा से पूर्ण किया जाता है।
- अक्षय फलदायी: उज्जैन सिद्ध पीठ पर किया गया यह अनुष्ठान मांगलिक दोष के उग्र प्रभावों को स्थायी रूप से शांत करता है।
अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)
- शास्त्रीय संकल्प: यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण, स्थान और गोत्र का सस्वर उच्चारण कर अनुष्ठान का संकल्प।
- गणेश व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, नवग्रह मंडल स्थापना एवं मंगल देव का विशेष षोडशोपचार पूजन।
- 40,000 मंगल बीज मंत्र जप: 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा मंगल ग्रह के अत्यंत प्रभावशाली बीज मंत्र “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का 40,000 बार सस्वर पाठ।
- मंगल शांति महाहवन: जप समाप्ति के पश्चात लाल चंदन, गुग्गुल, घृत, समिधाओं व पीतांबर द्रव्यों से दशांश हवन।
- पूर्णाहुति व आशीर्वाद: पूर्णाहुति, आरती, विप्र दक्षिणा एवं यजमान के सुखद दांपत्य व आरोग्यता हेतु शांति पाठ।
इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)
- मांगलिक दोष का पूर्ण निवारण: कुंडली के मंगल दोष का उग्र प्रभाव शांत होकर शुभता प्राप्त होती है।
- शीघ्र व सुखद विवाह: विवाह में आ रही सभी रुकावटें दूर होती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- दांपत्य जीवन में मधुरता: पति-पत्नी के बीच प्रेम, सामंजस्य और आपसी समझ बढ़ती है।
- क्रोध व आक्रामकता पर नियंत्रण: स्वभाव में धैर्य, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- स्वास्थ्य व रक्त विकार में सुधार: बीपी, रक्त संबंधी दोषों और दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है।
- भूमि व संपत्ति लाभ: अचल संपत्ति, भूमि लाभ और करियर में पदोन्नति के योग बनते हैं।
पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):
- पूरा नाम (Full Name)
- पिता का नाम (Father’s Name)
- जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
- गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)
नोट: बुकिंग के पश्चात पूजा की तिथि और समय की जानकारी आपको अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी। अनुष्ठान की फोटो/वीडियो रिपोर्ट आपको भेजी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या मुझे इस अनुष्ठान के लिए उज्जैन सिद्धवट घाट पर उपस्थित रहना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, यदि आप स्वयं उज्जैन नहीं आ सकते हैं तो हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट पर आपके नाम और गोत्र का व्यक्तिगत संकल्प लेकर पूरी शास्त्रीय विधि से आपकी अनुपस्थिति में भी अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
Q2. क्या पूजा पूरी होने के बाद प्रमाण हेतु फोटो या वीडियो मिलेगा?
उत्तर: हाँ, अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद आपको पूजा के संकल्प एवं हवन की फोटो और वीडियो रिपोर्ट भेजी जाएगी।
Q3. क्या पूजा के बाद प्रसाद घर भेजा जाता है?
उत्तर: हाँ, अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद सिद्धवट घाट से अभिमंत्रित प्रसादी, मंगल रक्षासूत्र और हवन भस्म आपके दिए गए पते पर कूरियर द्वारा भेजी जाएगी।
Q4. मंगल पूजा के लिए सबसे शुभ दिन कौन सा माना गया है?
उत्तर: मंगलवार का दिन मंगल ग्रह की शांति और मंगल देव के पूजन के लिए सर्वाधिक शुभ और फलदायी माना गया है।








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