चंद्र जाप (44000 जप)

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क्या आपकी कुंडली में चंद्रमा नीच/पीड़ित स्थिति में हैं, राहु-केतु या शनि से पीड़ित होकर ग्रहण दोष या विष दोष बना रहे हैं, या आप अत्यधिक मानसिक तनाव, अवसाद (Depression), अनिद्रा (Sleep issues), अकारण बेचैनी, मूड स्विंग्स या भावनात्मक असंतुलन का सामना कर रहे हैं? ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मनसो जात:’ अर्थात् मन और भावनाओं का स्वामी माना गया है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 वेदज्ञ कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 2 दिनों में 44,000 चंद्र बीज मंत्र (ॐ सों सोमाय नमः) का सस्वर जप, नवग्रह पूजन, विशेष चंद्र शांति हवन एवं…

Description

चंद्र मंत्र जाप (44,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा मन, संवेदनशीलता, माता, जल, रक्तचाप और मानसिक स्थिति के कारक ग्रह हैं। जब कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ ग्रहों (शनि, राहु, केतु) के प्रभाव में होता है, तो व्यक्ति का मन चंचल, भ्रमित और नकारात्मक सोच से घिर जाता है। ऐसे में वैदिक रीति से 44,000 चंद्र मंत्रों का जप और शांति हवन कराने से चंद्रमा का दुष्प्रभाव समाप्त होता है। यह अनुष्ठान चेतना को जागृत करता है, मानसिक स्पष्टता देता है और जीवन में सुख, शांति तथा आकर्षण का संचार करता है।

कुंडली में चंद्र दोष के मुख्य लक्षण:

  • अत्यधिक मानसिक अशांति, अकारण भय, घबराहट (Anxiety) और अवसाद।
  • निर्णय लेने में अस्थिरता, स्मरण शक्ति की कमी और विचारों में निरंतर उतार-चढ़ाव।
  • अनिद्रा (Insomnia), डरावने सपने आना या नींद पूरी न होना।
  • माता के स्वास्थ्य में गिरावट या माता के साथ संबंधों में तनाव होना।
  • रक्तचाप (Blood Pressure), जल संबंधी विकार या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन मोक्षदायिनी नगरी और काल चक्र की अधिष्ठात्री भूमि है। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट (शिप्रा नदी तट) को मनोकामना पूर्ति और ग्रह शांति के लिए अत्यंत जाग्रत सिद्ध पीठ माना गया है:

  • अक्षय कल्पवृक्ष (सिद्धवट): सिद्धवट के पावन प्रांगण में चंद्रमा की उपासना करने से मन की समस्त चंचलता शांत होती है और अनंत फल की प्राप्ति होती है।
  • 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा जप: 2 दिनों तक शास्त्रोक्त मर्यादा से शुद्ध सस्वर “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का निरंतर पाठ।
  • पूर्ण पारदर्शी अनुष्ठान: यजमान के नाम, पिता के नाम और गोत्र का स्पष्ट उच्चारण कर संकल्प लिया जाता है।

अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के साथ मानसिक शांति व चंद्र दोष शमन हेतु संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह मंडल की स्थापना।
  3. चंद्र देव आवाहन व ध्यान: सफेद वस्त्र, श्वेत पुष्प व अक्षत से भगवान चंद्रदेव का षोडशोपचार पूजन।
  4. 44,000 चंद्र मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा 2 दिनों में 44,000 बीज मंत्रों का सस्वर जप।
  5. चंद्र शांति हवन (Havan): जप के उपरांत पलाश समिधा, खीर, सफेद तिल व घी से शास्त्रीय हवन।
  6. दान व पूर्ण आहुति: सफेद वस्त्र, चावल, दूध, मिश्री व चांदी की वस्तु का दान एवं आरती।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • मानसिक शांति व अवसाद से मुक्ति: चिंता, तनाव और अकारण भय दूर होकर मन में असीम शांति आती है।
  • भावनात्मक नियंत्रण व आत्मविश्वास: विचारों में स्थिरता आती है और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  • उत्तम स्वास्थ्य व अनिद्रा से राहत: नींद की समस्या दूर होती है और मानसिक व शारीरिक आरोग्य प्राप्त होता है।
  • पारिवारिक सामंजस्य व प्रेम: घर में सुख, शांति, प्रेम और माता के साथ संबंधों में मधुरता आती है।
  • चंद्र दोष का शमन: ग्रहण दोष, विष दोष व केमद्रुम दोष का दुष्प्रभाव शांत होकर शुभ प्रभाव मिलने लगता है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या चंद्र जाप ऑनलाइन कराया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आप घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन में आपके नाम-गोत्र का संकल्प लेकर पूरी विधि से जाप संपन्न करेंगे।

Q2. क्या पूजा के समय मेरा उपस्थित रहना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में भी पंडित जी संकल्प लेकर अनुष्ठान करते हैं, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Q3. चंद्र जाप के लिए सबसे शुभ दिन कौन सा माना जाता है?
उत्तर: सोमवार और पूर्णिमा का दिन चंद्र मंत्र जाप आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

Q4. क्या पूजा पूर्ण होने के बाद कोई प्रमाण प्राप्त होगा?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको अनुष्ठान के फोटो/वीडियो और सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी, रक्षासूत्र आपके पते पर भेजी जाएगी।

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