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गुरु मंत्र जाप (19,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)
वैदिक ज्योतिष और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति नवग्रहों में सबसे शुभ और कल्याणकारी ग्रह माने गए हैं। गुरु व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, विवेक, धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा, धन और वैवाहिक स्थिरता के नियंत्रक हैं। जब कुंडली में गुरु नीच राशि (मकर) में हों, राहु-केतु से पीड़ित होकर ‘गुरु चांडाल योग’ बना रहे हों, या सूर्य से अस्त हों, तो व्यक्ति की निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। बने-बनाये काम अंतिम समय पर बिगड़ जाते हैं, विद्या में मन नहीं लगता और परिवार में अशांति रहती है। उज्जैन स्थित सिद्धवट घाट पर 5 विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से 19,000 गुरु मंत्रों का जाप और शांति महाहवन कराने से देवगुरु प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विवेक और सुख-सौभाग्य की वृद्धि होती है।
कुंडली में कमजोर या पीड़ित गुरु के मुख्य लक्षण:
- उच्च शिक्षा, प्रतियोगिता परीक्षा और करियर के चयन में बार-बार असफलता व रुकावटें।
- कन्याओं के विवाह में अत्यधिक विलंब होना या वैवाहिक जीवन में सामंजस्य की कमी।
- संतान प्राप्ति में बाधाएं आना या संतान की प्रगति व स्वास्थ्य को लेकर निरंतर चिंता।
- गलत निर्णयों के कारण आर्थिक नुकसान, कर्ज बढ़ना और आय के स्रोतों में अनिश्चितता।
- पाचन तंत्र, लिवर, पीलिया या वजन नियंत्रण से जुड़ी शारीरिक समस्याएं।
उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?
उज्जैन (अवंतिका) काल गणना का मुख्य केंद्र है और यहाँ भगवान महाकाल स्वयं समय के देवता के रूप में विराजित हैं। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन कल्पवृक्ष सिद्ध पीठ है:
- अक्षय कल्पवृक्ष पीठ: सिद्धवट के पावन प्रांगण में की गई गुरु पूजा, मंत्र जप और दान का फल कई गुना बढ़कर शीघ्र प्राप्त होता है।
- 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा जप: उज्जैन के उच्च कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में शुद्ध वैदिक उच्चारण और लयबद्धता के साथ 19,000 गुरु मंत्र जप का संपादन।
- शास्त्रोक्त दान विधान: पूजा के उपरांत गुरु ग्रह की प्रसन्नता हेतु पीत वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, केसर, केला व धार्मिक पुस्तकों का विधिवत दान।
अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)
- शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के आधार पर व्यक्तिगत गुरु दोष/चांडाल दोष निवारण संकल्प।
- गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मण्डल का विधि-विधान से पूजन।
- देवगुरु बृहस्पति आवाहन व ध्यान: भगवान गुरु का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
- 19,000 गुरु मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” अथवा वैदिक गुरु मंत्र का सस्वर 19,000 बार पाठ।
- गुरु शांति महाहवन (Havan): पीपल की समिधा, पीली सरसों, तिल, घी व विशेष हविष्य से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
- दान व पूर्ण आहुति: गुरु ग्रह की प्रसन्नता हेतु पीली वस्तुओं का दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।
इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)
- गुरु चांडाल योग व ग्रह दोष से मुक्ति: बृहस्पति के अशुभ प्रभाव समाप्त होकर जीवन में शुभता और स्थिरता आती है।
- शिक्षा व करियर में अपार सफलता: विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ती है, प्रतियोगिता परीक्षाओं व उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है।
- शीघ्र विवाह व वैवाहिक सुख: विवाह के मार्ग में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- भाग्य वृद्धि व आर्थिक समृद्धि: अटके हुए काम बनने लगते हैं, धन का संचय होता है और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
- विवेक व मानसिक शांति: असमंजस की स्थिति समाप्त होती है, विचार स्पष्ट होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):
- पूरा नाम (Full Name)
- पिता का नाम (Father’s Name)
- जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
- गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)
नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या गुरु मंत्र जाप (19,000 जाप) ऑनलाइन करवाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आप घर बैठे यह पूजा ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन में आपके नाम-गोत्र का संकल्प लेकर पूरी शास्त्रीय विधि से अनुष्ठान करेंगे।
Q2. क्या मुझे व्यक्तिगत रूप से पूजा में उपस्थित होना होगा?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में पंडित जी आपके नाम और जन्म विवरण से संकल्प लेकर जाप करेंगे, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होगा।
Q3. क्या पूजा के बाद फोटो, वीडियो या रिपोर्ट मिलती है?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको पूजा रिपोर्ट, संकल्प वीडियो, हवन की फोटो व वीडियो क्लिप भेजी जाती है। साथ ही अभिमंत्रित प्रसादी आपके पते पर भेजी जाती है।
Q4. यह जाप किस दिन कराना सबसे शुभ माना जाता है?
उत्तर: बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन या शुक्ल पक्ष में गुरु मंत्र जाप आरंभ कराना सर्वाधिक प्रभावशाली और फलदायी माना जाता है।








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