शनि जाप (92000 जप)

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क्या आप शनि की साढ़े साती, ढैय्या, शनि महादशा/अंतरदशा, निरंतर आर्थिक रुकावटों, कर्ज के बोझ, नौकरी या व्यापार में अचानक आ रही मंदी, अथवा लंबे समय से चले आ रहे अवसाद, भय और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं? वैदिक ज्योतिष में भगवान शनैश्चर को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना गया है, जो व्यक्ति के पूर्वजन्मों व वर्तमान कर्मों के दोषों का शमन करते हैं। उज्जैन के अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 विद्वान आचार्यों द्वारा शनि मूल मंत्र (ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥) का 92,000 सस्वर महाजाप, 1/10वां हिस्सा दशांश हवन, तर्पण, मार्जन व…

Description

शनि मंत्र (92,000) महाजाप अनुष्ठान क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, जब कुंडली में शनि देव नीच राशि (मेष) में हों, सूर्य-राहु के साथ पीड़ित हों, या व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा हो, तो जीवन में संघर्ष, अनचाहे उतार-चढ़ाव और मानसिक क्लेश अचानक बढ़ जाते हैं। शनि के दुष्प्रभावों को निष्प्रभावी करने के लिए शास्त्रों में 92,000 की प्रामाणिक संख्या में मंत्र जाप, दशांश हवन और दान को अचूक समाधान माना गया है। यह महाजाप आपके कठिन कर्मिक बंधनों को शुद्ध करता है, शनि देव के कोप को शांत करता है और जीवन में अनुशासन, स्थिरता व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

शनि की अशुभ दशा, साढ़े साती या ढैय्या के मुख्य लक्षण:

  • कड़ी मेहनत के बाद भी कार्यों का अंतिम समय पर अटक जाना और असफलता मिलना।
  • व्यापार में अचानक भारी घाटा, नौकरी छूटना या करियर में बार-बार अड़चनें आना।
  • अत्यधिक कर्ज होना, कोर्ट-कचहरी या पुलिस केस में उलझना।
  • अकारण मानसिक अवसाद (Depression), डर, अनिद्रा, नसों व जोड़ों का दर्द या लकवा/वात रोग।
  • पारिवारिक सदस्यों से वैचारिक मतभेद, समाज में अपमान और अपयश की स्थिति बनना।

सिद्धवट घाट (उज्जैन) से ही यह अनुष्ठान क्यों कराएं?

उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित काल गणना का केंद्र है और यहाँ भगवान शिव स्वयं महाकाल के रूप में विराजित हैं। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट का वटवृक्ष मनोकामना पूर्ति और कर्म शुद्धि के लिए अद्वितीय स्थान माना गया है:

  • अक्षय कर्म शुद्धि पीठ: पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित प्राचीन सिद्धवट के नीचे किया गया शनि जाप एवं तर्पण अनंत गुना फल प्रदान करता है।
  • पूर्ण 6-चरणीय वैदिक विधान: 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा संकल्प, 92,000 बीज मंत्र जाप, दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और शनि दान का शास्त्रीय पालन।
  • 3 दिवसीय गहन साधना: अनुष्ठान को पूर्ण शुद्धता, ब्रह्मचर्य और एकाग्रता के साथ 3 दिनों में संपन्न कराया जाता है।

शनि महाजाप अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण, गोत्र और कष्ट निवारण हेतु संकल्प।
  2. शनि देव आवाहन व पूजन: शनि यन्त्र एवं सर्वतोभद्र मंडल पर भगवान शनैश्चर का ध्यान, आवाहन व षोडशोपचार तांत्रिक-वैदिक पूजन।
  3. 92,000 शनि मंत्र जाप (Mantra Chanting): 5 विद्वान विप्रों द्वारा “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥” मंत्र का 92,000 बार सस्वर पाठ।
  4. शनि शांति दशांश हवन (Shani Dashansh Havan): मंत्र जाप पूर्ण होने पर 1/10वां हिस्सा (दशांश) काला तिल, सरसों, समी पत्र, नीले पुष्प व घृत से महाहवन।
  5. शनि तर्पण व मार्जन (Tarpan & Marjan): शनि देव की तृप्ति हेतु वैदिक तर्पण और यजमान के पाप शमन हेतु पवित्र जल से मार्जन।
  6. शनि दान व विप्र दक्षिणा (Donation & Dakshina): अनुष्ठान की पूर्णता हेतु काला कपड़ा, लोहा, उड़द, तिल व तेल का दान एवं आचार्यों को दक्षिणा।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • साढ़े साती व ढैय्या से मुक्ति: शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और जीवन सुगम बनता है।
  • आर्थिक स्थिरता व कर्जमुक्ति: धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं और व्यापार व नौकरी में रुकी हुई सफलता प्राप्त होती है।
  • कोर्ट केस व विवादों में राहत: शत्रु शमन होता है और कानूनी मामलों में परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं।
  • कर्मिक बाधाओं का नाश: पूर्वजन्मों के पाप-ताप शांत होते हैं और मानसिक तनाव व भय समाप्त होता है।
  • आरोग्यता व आत्मबल: वात संबंधी रोगों, शारीरिक कष्टों और नसों की पीड़ा में लाभ मिलता है।

अनुष्ठान बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: अनुष्ठान की तिथि, समय और लाइव वीडियो कॉल लिंक की जानकारी आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या शनि जाप ऑनलाइन हो सकता है और क्या मैं लाइव जुड़ सकता हूँ?
उत्तर: हाँ, आपको अनुष्ठान के दौरान वीडियो कॉल द्वारा लाइव जोड़ा जाता है ताकि आप घर बैठे संकल्प व आरती में सहभागिता कर सकें।

Q2. क्या पूजा के समय मेरा उज्जैन सिद्धवट घाट पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी है?
उत्तर: नहीं, आपकी उपस्थिति वैकल्पिक है। यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते हैं तो 5 विद्वान आचार्य आपके नाम और गोत्र का संकल्प लेकर पूरी विधि से अनुष्ठान संपन्न करेंगे।

Q3. क्या मुझे पूजा के फोटो, वीडियो और प्रसादी मिलेगी?
उत्तर: हाँ, अनुष्ठान के संपूर्ण फोटो और वीडियो आपके व्हाट्सएप पर शेयर किए जाएंगे तथा अभिमंत्रित प्रसादी आपके पते पर कूरियर द्वारा भेजी जाएगी।

Q4. यह 92,000 जाप अनुष्ठान कब कराना सबसे अधिक लाभकारी होता है?
उत्तर: जब आपकी कुंडली में शनि महादशा, अंतरदशा, साढ़े साती, ढैय्या चल रही हो, या जीवन में अत्यधिक आर्थिक व मानसिक संघर्ष आ रहा हो, तब यह जाप अत्यंत फलदायी रहता है।

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