केतु शांति पूजा

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क्या आपकी कुंडली में केतु ग्रह नीच या अशुभ स्थिति में हैं, सूर्य-चंद्र के साथ ग्रहण दोष बना रहे हैं, अथवा आप केतु महादशा, अकारण भय, अज्ञात बीमारियां, अचानक धन हानि, अलगाव (Separation), या करियर व पारिवारिक जीवन में निरंतर विघ्नों का सामना कर रहे हैं? ज्योतिष में केतु को क्रूर छाया ग्रह माना गया है जो व्यक्ति की सोच को प्रभावित कर जीवन में अस्थिरता पैदा करता है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर विद्वान वेदज्ञ आचार्यों द्वारा 18,000 केतु बीज मंत्रों का सस्वर जप, नवग्रह पूजन, विशेष केतु शांति हवन…

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Description

केतु शांति पूजा क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु और केतु दोनों ही अत्यंत प्रभावकारी एवं क्रूर छाया ग्रह माने गए हैं। इनकी क्रूरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा जैसे प्रत्यक्ष देव भी इनके प्रभाव से नहीं बच पाते और ग्रहण का शिकार होते हैं। जब कुंडली में केतु अशुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को अचानक आने वाले संकटों, अज्ञात भय, भ्रम, त्वचा एवं नसों की बीमारियों और कार्य-व्यापार में अकारण रुकावटों का सामना करना पड़ता है। सिद्धवट घाट (उज्जैन) पर विधि-विधान से केतु शांति पूजा कराने से केतु देव की हानिकारक दृष्टि शुभता में बदलती है और जीवन में आध्यात्मिक व भौतिक संतुलन स्थापित होता है।

कुंडली में केतु दोष के मुख्य लक्षण:

  • कार्यों में अचानक रुकावटें आना और बने बनाए काम अंतिम समय पर बिगड़ जाना।
  • मानसिक भ्रम (Confusion), एकाग्रता की कमी और वैराग्य या अकारण उदासी रहना।
  • शरीर में अज्ञात बीमारियां, नसों या त्वचा संबंधी विकार जिनका निदान आसानी से न हो।
  • परिवार में अकारण क्लेश, अलगाव और संतान सुख में बाधाएं आना।
  • गुप्त शत्रुओं का प्रभाव बढ़ना और नकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होना।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन (अवंतिका) काल गणना का मुख्य केंद्र और मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में से एक है। यहाँ भगवान शिव ‘महाकाल’ के रूप में समय के देवता बनकर विराजित हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट (अक्षय कल्पवृक्ष) क्षेत्र में की गई ग्रह शांति पूजा अति शीघ्र फल प्रदान करती है:

  • सिद्धवट कल्पवृक्ष पीठ: सिद्धवट के जाग्रत प्रांगण में पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और ग्रह दोषों का तुरंत शमन होता है।
  • 18,000 केतु मंत्र जप: विद्वान आचार्यों द्वारा केतु देव के 18,000 बीज मंत्रों का सस्वर एवं शुद्ध जप।
  • शास्त्रोक्त दान विधान: पूजा के उपरांत केतु से संबंधित वस्तुओं (काले तिल, उड़द, दोरंगा वस्त्र आदि) का विधिवत दान।

केतु शांति पूजा की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के साथ केतु दोष निवारण हेतु संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मंडल का पूजन।
  3. केतु देव आवाहन व ध्यान: केतु ग्रह का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
  4. 18,000 केतु मंत्र जाप: आचार्यों द्वारा “ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः” अथवा वैदिक केतु मंत्र का सस्वर पाठ।
  5. केतु शांति हवन (Havan): विशेष समिधाओं, कुशा, तिलों और घी से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
  6. दान व पूर्ण आहुति: केतु ग्रह की संतुष्टि हेतु वस्तु दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।

इस पूजा से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • केतु की शुभता: केतु की हानिकारक व क्रूर दृष्टि समाप्त होकर लाभदायक प्रभाव देने लगती है।
  • पारिवारिक सुख व संतान प्राप्ति: परिवार में चल रहे उपद्रव समाप्त होते हैं और संतान संबंधी सुख प्राप्त होता है।
  • मानसिक एकाग्रता व स्पष्टता: भ्रम, अवसाद और नकारात्मक सोच दूर होकर एकाग्रता एवं आत्मबल बढ़ता है।
  • बाधाओं से मुक्ति: करियर, व्यापार और जीवन में आ रही अचानक रुकावटें दूर होती हैं।
  • आरोग्यता: चर्म रोग, नसों के विकार और अज्ञात बीमारियों में राहत मिलती है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या केतु शांति पूजा घर बैठे ऑनलाइन कराई जा सकती है?
उत्तर: हाँ, आप घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन से आपके नाम और गोत्र का संकल्प लेकर पूरी विधि से अनुष्ठान संपन्न करेंगे।

Q2. क्या पूजा के समय मेरा स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य है?
उत्तर: नहीं, आपकी उपस्थिति आवश्यक नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में भी पंडित जी आपके नाम-गोत्र से संकल्प लेकर पूजा करते हैं, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Q3. क्या पूजा का कोई प्रमाण या वीडियो मिलेगा?
उत्तर: हाँ, पूजा संपन्न होने के बाद आपको संकल्प और पूजा के फोटो/वीडियो तथा सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी आपके दिए गए पते पर भेजी जाएगी।

Q4. केतु शांति पूजा के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम माना जाता है?
उत्तर: मंगलवार, शनिवार या केतु के नक्षत्रों में यह पूजा कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

1 review for केतु शांति पूजा

  1. Ashok Kumar Saxena –

    The pooja ceremony was conducted with utmost care and devotion, creating a sacred space for healing.

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