अश्वत्थ विवाह

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अश्वत्थ विवाह एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष के साथ विवाह संपन्न कराया जाता है। यह अनुष्ठान उन जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में पितृ दोष, वैवाहिक बाधाएँ या विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो। शास्त्रों के अनुसार पीपल वृक्ष में पितरों और देवताओं का वास माना गया है। अश्वत्थ विवाह के माध्यम से पितृ दोष के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और विवाह से जुड़ी रुकावटें दूर होती हैं। विधि-विधान से किया गया यह अनुष्ठान शीघ्र विवाह, वैवाहिक स्थिरता और पारिवारिक शांति प्रदान करता है।

Description

अश्वत्थ विवाह — मांगलिक दोष, वैवाहिक बाधा और विवाह विलंब निवारण हेतु विशेष वैदिक संस्कार

अश्वत्थ विवाह — क्यों कराया जाता है?

अश्वत्थ विवाह एक प्राचीन वैदिक उपाय है, जो विशेष रूप से
मांगलिक दोष, कुंडली दोष और विवाह में आ रही बाधाओं के निवारण हेतु किया जाता है।

जिन व्यक्तियों की कुंडली में

  • मंगल दोष (मांगलिक दोष)
  • विवाह में बार-बार रुकावट
  • विवाह तय होकर टूट जाना
  • विवाह में अत्यधिक विलंब
  • दांपत्य जीवन को लेकर भय

होता है, उनके लिए अश्वत्थ विवाह अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।

इस संस्कार में वर या वधू का विवाह पहले अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष से कराया जाता है, जिससे कुंडली में स्थित दोष का शमन होता है और वास्तविक विवाह में बाधा समाप्त होती है।


अश्वत्थ विवाह किन समस्याओं में किया जाता है?

अश्वत्थ विवाह निम्न परिस्थितियों में विशेष रूप से कराया जाता है:

  • मांगलिक दोष के कारण विवाह में विलंब
  • विवाह प्रस्तावों का बार-बार टूटना
  • कुंडली मिलान के बाद भी विवाह न हो पाना
  • दांपत्य जीवन में अनिष्ट की आशंका
  • कुंडली में वैवाहिक योग कमजोर होना

यह संस्कार वैवाहिक जीवन की रक्षा और शांति के लिए किया जाता है।


उज्जैन में ही क्यों करें अश्वत्थ विवाह?

उज्जैन को वैदिक संस्कारों और ग्रह दोष निवारण की सिद्ध भूमि माना गया है।
यहाँ सिद्धवट घाट पर किया गया अश्वत्थ विवाह शीघ्र और स्थायी फल प्रदान करता है।

  • अनुभवी विद्वान पंडितों द्वारा शास्त्रानुसार संस्कार
  • पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष के साथ वैदिक विवाह विधि
  • नाम-गोत्र सहित संकल्प
  • मंगल दोष शांति मंत्र एवं पूजन

हजारों श्रद्धालुओं ने उज्जैन में अश्वत्थ विवाह कर
विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति और सुखद वैवाहिक जीवन पाया है।


अश्वत्थ विवाह से मिलने वाले लाभ

✔ मांगलिक दोष का शमन
✔ विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण
✔ विवाह विलंब से मुक्ति
✔ दांपत्य जीवन की रक्षा
✔ मानसिक भय और तनाव में कमी
✔ शीघ्र विवाह के योग
✔ वैवाहिक जीवन में सुख और स्थिरता


अश्वत्थ विवाह की विधि

अश्वत्थ विवाह निम्न वैदिक विधि से संपन्न किया जाता है:

  • संकल्प एवं गणेश पूजन
  • अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष पूजन
  • वैदिक मंत्रों के साथ प्रतीकात्मक विवाह
  • मंगल दोष शांति पाठ
  • पूर्णाहुति एवं आशीर्वाद

पूरी प्रक्रिया शास्त्रानुसार, गोपनीयता और श्रद्धा के साथ की जाती है।


अश्वत्थ विवाह कौन करवा सकता है?

  • मांगलिक दोष से पीड़ित युवक या युवती
  • जिनके विवाह में बार-बार रुकावट आ रही हो
  • विवाह में अत्यधिक विलंब झेल रहे लोग
  • कुंडली दोष के कारण विवाह न हो पाने वाले
  • वैवाहिक जीवन को सुरक्षित करना चाहने वाले

संस्कार की अवधि

लगभग 1.5 से 2 घंटे


पूजा बुकिंग के लिए आवश्यक जानकारी

कृपया संस्कार बुक करते समय नीचे दिए गए सभी विवरण “Order Comment Box” में अवश्य लिखें

  • Full Name (पूरा नाम)
  • Father’s Name (पिता का नाम)
  • Date, Time & Place of Birth (जन्म तिथि, समय व स्थान)
  • Gotra (गोत्र)

📌 आपको संस्कार की तारीख, समय और स्थान की जानकारी अग्रिम रूप से दे दी जाएगी।
📌 सभी अनुष्ठान वैदिक परंपरा और शास्त्रानुसार विद्वान पंडितों द्वारा सिद्धवट घाट, उज्जैन से किए जाते हैं।
📌 संस्कार पूर्ण होने के पश्चात विशेष प्रसादी आपके दिए गए पते पर भेजी जाती है।


अश्वत्थ विवाह से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अश्वत्थ विवाह किसे कराना चाहिए?

जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष हो और विवाह में लगातार बाधाएँ आ रही हों, उन्हें अश्वत्थ विवाह कराना चाहिए।


Q2. क्या अश्वत्थ विवाह के बाद वास्तविक विवाह किया जा सकता है?

हाँ। अश्वत्थ विवाह का उद्देश्य दोष शमन है, इसके बाद वास्तविक विवाह पूर्णतः सुरक्षित माना जाता है।


Q3. क्या यह संस्कार पुरुष और महिला दोनों के लिए किया जाता है?

हाँ, आवश्यकता अनुसार वर या वधू दोनों में से किसी का भी अश्वत्थ विवाह कराया जा सकता है।


Q4. क्या मुझे स्वयं उपस्थित रहना आवश्यक है?

नहीं। हमारे विद्वान पंडित आपकी ओर से विधिवत अश्वत्थ विवाह संस्कार संपन्न करते हैं


Q5. संस्कार के बाद क्या प्राप्त होता है?

संस्कार पूर्ण होने के पश्चात विशेष वैदिक प्रसादी आपके पते पर भेजी जाती है।


Q6. अश्वत्थ विवाह का प्रभाव कब से दिखाई देता है?

कई लोगों को संस्कार के बाद शीघ्र विवाह प्रस्ताव और बाधाओं में कमी अनुभव होने लगती है।


आज ही अश्वत्थ विवाह बुक करें

मांगलिक दोष, विवाह विलंब और वैवाहिक बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए
उज्जैन की पावन भूमि पर विधिवत अश्वत्थ विवाह कराएँ।

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