कालसर्प दोष निवारण पूजा

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क्या आपकी जन्मकुंडली में सभी सप्तग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के मध्य आकर कालसर्प दोष का निर्माण कर रहे हैं, जिसके कारण निरंतर मानसिक तनाव, आर्थिक क्षति, अकारण भय, डरावने सपने, पारिवारिक कलह या बनते-बनते काम बिगड़ने की समस्या हो रही है? वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष को जीवन में अस्थिरता और संघर्ष का मुख्य कारण माना गया है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 वेदज्ञ कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में नाम-गोत्र संकल्प, राहु-केतु संयुक्त मंत्र जप, नवग्रह मण्डल पूजन, कालसर्प शांति महाहवन व…

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Description

कालसर्प दोष निवारण पूजा क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष और पुराणों के अनुसार, जब कुंडली में छाया ग्रह राहु और केतु के एक तरफ सभी ग्रह आ जाते हैं, तो कालसर्प योग/दोष बनता है। यह दोष जातक की क्षमता और मेहनत के बावजूद उसे अपेक्षित सफलता से वंचित रखता है। इसके प्रभाव से जीवन चक्र में बार-बार अनचाही बाधाएं, आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक अस्थिरता, अज्ञात भय तथा स्वप्न में सर्प दिखाई देना जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। उज्जैन स्थित अति सिद्ध पीठ सिद्धवट घाट पर 5 कर्मकांडी विद्वानों द्वारा विधि-विधान से राहु-केतु शांति मंत्रों का जाप, चांदी के नाग-नागिन का पूजन व विसर्जन तथा महाहवन कराने से सर्प दोष और राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव पूर्णतः शांत होता है।

कुंडली में कालसर्प दोष के मुख्य लक्षण:

  • कठिन परिश्रम के बाद भी अंतिम क्षणों में असफलता मिलना और करियर में रुकावटें।
  • सपने में अक्सर पानी, सर्प, या ऊंचाई से गिरने के विचार आना व अज्ञात भय रहना।
  • पारिवारिक जीवन में अकारण तनाव, मतभेद और सुख-शांति का अभाव।
  • स्वास्थ्य में निरंतर उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव, डिप्रेशन या ऊर्जा की कमी महसूस होना।
  • व्यापार व धन संचय में भारी नुकसान और अचानक वित्तीय संकट का आना।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन (अवंतिका) काल गणना का मुख्य केंद्र है और यहाँ भगवान महाकाल स्वयं समय के देवता के रूप में विराजित हैं। पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित सिद्धवट घाट पर भगवान शिव ‘सिद्धवटेश्वर महादेव’ के रूप में विद्यमान हैं:

  • सिद्धवट कल्पवृक्ष पीठ: स्कंद पुराण के अनुसार, सिद्धवट वृक्ष के नीचे की गई नाग बलि, सर्प दोष शांति व तर्पण का फल अनंत गुना होकर शीघ्र फलदायी होता है।
  • 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा अनुष्ठान: उज्जैन के उच्च कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 1 दिन में शुद्ध वैदिक रीति, सस्वर राहु-केतु मन्त्रोच्चार और शास्त्रीय मर्यादा से पूजा का संपादन।
  • नाग-नागिन विसर्जन विधान: शास्त्रोक्त विधि से पूजन के उपरांत चांदी के नाग-नागिन जोड़े का पवित्र शिप्रा जल में विसर्जन एवं दान।

अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के आधार पर व्यक्तिगत कालसर्प दोष शांति संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मण्डल का विधि-विधान से पूजन।
  3. राहु-केतु व नाग पूजन: राहु और केतु ग्रह का ध्यान, आवाहन तथा चांदी के नाग-नागिन जोड़े का षोडशोपचार पूजन।
  4. राहु-केतु मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा राहु और केतु देव के वैदिक व पौराणिक मंत्रों का सस्वर जप पाठ।
  5. कालसर्प शांति महाहवन (Havan): दूर्वा, कुश, तिल, घी व विशेष हविष्य से अग्निकुंड में आहुतियाँ अर्पण।
  6. नाग विसर्जन, दान व पूर्ण आहुति: पूजन के उपरांत चांदी के नाग-नागिन का जल विसर्जन, वस्त्र व अन्न दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • दोष निवारण व मानसिक शांति: राहु-केतु का अशुभ प्रभाव समाप्त होता है, मानसिक तनाव और अकारण डर दूर होता है।
  • करियर व व्यवसाय में सफलता: रुकावटें समाप्त होती हैं, कार्यक्षेत्र में उन्नति, धन लाभ और पद-प्रतिष्ठा मिलती है।
  • पारिवारिक स्थिरता: घर-परिवार में आ रहे क्लेश दूर होते हैं और आपसी प्रेम व सामंजस्य बढ़ता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: जीवन में आत्मबल, साहस, आत्मविश्वास और स्पष्ट निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  • अनिद्रा व भय से मुक्ति: बुरे सपनों, अनिद्रा और अशुभ संकेतों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या कालसर्प दोष निवारण पूजा ऑनलाइन की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, आप अपने घर बैठे यह पूजा ऑनलाइन बुक कर सकते हैं और वीडियो कॉल के माध्यम से लाइव अनुष्ठान में सहभागिता कर सकते हैं।

Q2. क्या मुझे उज्जैन में उपस्थित होना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। विद्वान पंडित जी आपके नाम, गोत्र और जन्म विवरण का संकल्प लेकर पूरी विधि से पूजन संपन्न करेंगे।

Q3. क्या पूजा के बाद कोई प्रमाण, फोटो या प्रसादी मिलती है?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको अनुष्ठान के फोटो, वीडियो क्लिप, पूजा रिपोर्ट और सिद्धवट से अभिमंत्रित प्रसादी कूरियर द्वारा भेजी जाती है।

Q4. यह पूजा कितने समय में पूरी होती है?
उत्तर: यह अनुष्ठान 1 दिन में 5 विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान, मंत्र जाप, नाग-नागिन पूजन, हवन और दान के साथ पूर्ण किया जाता है।

9 reviews for कालसर्प दोष निवारण पूजा

  1. Laxmi Sharma –

    Awesome pooja, pandit ji is very polite and explain everything. thank you

  2. manish kumar pandey –

    Ujjain is truly a sacred place, and the Kalsarp Pooja intensified its divine aura. I experienced a deep sense of purification and renewal.

  3. ARSHIA THAKUR –

    Being part of the Kalsarp Pooja in Ujjain was really special. It made me feel really grateful and peaceful.

  4. GAJANAN JOSHI –

    The Kalsarp Pooja in Ujjain was a really great experience. It made me feel really clear-headed and happy.

  5. sibananda mohanty –

    Ujjain’s atmosphere is really peaceful, and the Kalsarp Pooja made it even more special. I felt really lucky to be there.

  6. Hari Murari Patel –

    I was really amazed by how peaceful and special the Kalsarp Pooja in Ujjain was. It’s something I’ll always remember.

  7. Varsha Kale –

    Panditji was helpful, and the pooja was completed without any problems.

  8. Lipika Sharma –

    Panditji’s support and assistance were invaluable in ensuring a peaceful and successful completion of the pooja.

  9. Shivam Vishwakarma –

    With Panditji’s helpful guidance, the pooja concluded peacefully, leaving us with a sense of tranquility.

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