चंद्र केतु ग्रहण दोष पूजा

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क्या आप भीतर से अकारण भय, उदासी, मानसिक अशांति, अनिद्रा या जीवन में भावनात्मक खालीपन अनुभव कर रहे हैं? वैदिक ज्योतिष में जब मन का कारक ‘चंद्रमा’ और भ्रम/वैराग्य का कारक ‘केतु’ एक साथ बैठते हैं, तो ‘चंद्र-केतु ग्रहण दोष’ का निर्माण होता है। इसके कारण व्यक्ति का मन अशांत और एकाग्रता भंग रहती है। उज्जैन की पावन सिद्ध भूमि सिद्धवट घाट पर वेदज्ञ आचार्यों द्वारा चंद्र व केतु ग्रह के विशेष बीज मंत्र जाप, वैदिक हवन एवं आपके नाम-गोत्र संकल्प के साथ यह पूजा कराएं और मानसिक शांति, भय-मुक्ति व जीवन में स्थिरता प्राप्त करें। स्थान: सिद्धवट घाट, उज्जैन…

Description

चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मनसो जात:’ अर्थात् मन, भावनाओं, मानसिक संतुलन और माता का प्रतीक माना गया है, जबकि केतु एक छाया ग्रह है जो भ्रम, अचानक घटित होने वाली घटनाएं, अकेलापन और आंतरिक असंतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। जब कुंडली में चंद्र और केतु की युति (साथ बैठना) या दृष्टि संबंध होता है, तो चंद्रमा का शुभ प्रभाव क्षीण हो जाता है, जिसे ‘ग्रहण दोष’ कहा जाता है। इस दोष के प्रभाव से जातक के पास सब कुछ होते हुए भी वह अंदर से खालीपन, अनजाना डर और मानसिक भ्रम महसूस करता है। उज्जैन में सिद्धवट घाट पर शास्त्रोक्त विधि से चंद्र-केतु ग्रहण दोष शांति कराने से मन को असीम शांति मिलती है और जीवन की अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं।

चंद्र–केतु ग्रहण दोष के मुख्य लक्षण (यदि आप इनका सामना कर रहे हैं):

  • बिना किसी ठोस कारण के अत्यधिक मानसिक अशांति, अकारण भय, उदासी और अकेलापन महसूस होना।
  • ध्यान और एकाग्रता की भारी कमी, निर्णय लेने में लगातार भ्रम और असमंजस की स्थिति।
  • नींद में बाधा आना, डरावने या अजीब सपने दिखाई देना और मन का लगातार भटकना।
  • माता के स्वास्थ्य में गिरावट या माता के साथ संबंधों में तनाव व दूरियां आना।
  • करियर और personal लाइफ में बार-बार अनिश्चितता और भावनात्मक अस्थिरता रहना।

उज्जैन सिद्धवट घाट पर पूजा कराने का महत्व (अथॉरिटी एवं प्रामाणिकता)

अवंतिका नगरी (उज्जैन) अनादि काल से ही नवग्रह शांति, ग्रहण दोष निवारण और मानसिक शांति अनुष्ठानों के लिए सर्वोपरि सिद्ध क्षेत्र मानी गई है।

  • सिद्धवट घाट का पौराणिक महात्म्य: पवित्र शिप्रा तट स्थित सिद्धवट कल्पवृक्ष क्षेत्र में किया गया जप और हवन उग्र ग्रह दोषों का शीघ्र शमन करता है।
  • चंद्र-केतु मंत्र विधान: अनुष्ठान में दोनों ग्रहों की शांति हेतु उनके विशेष वैदिक व पौराणिक बीज मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता है।
  • अनुभवी कर्मकांडी आचार्य: संपूर्ण पूजा उज्जैन के विद्वान पंडितों द्वारा पूर्ण शास्त्रीय मर्यादा, शुद्धता और गोपनीयता के साथ संपन्न होती है।

चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. संकल्प एवं गणेश पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश का ध्यान कर यजमान के नाम, पिता के नाम व गोत्र का शुद्ध संकल्प।
  2. चंद्र एवं केतु ग्रह आवाहन: नवग्रह मंडल पर चंद्र देव और केतु ग्रह का आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
  3. विशेष बीज मंत्र जप: आचार्यों द्वारा चंद्र और केतु के शांति मंत्रों का सस्वर पाठ।
  4. ग्रहण दोष निवारण हवन: विशेष समिधाओं, तिल, ज्यों, दुग्ध व घृत द्वारा दोष शमन महायज्ञ।
  5. पूर्णाहुति व शांति पाठ: मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन व सकारात्मक ऊर्जा हेतु पूर्णाहुति एवं आशीर्वाद पाठ।

इस पूजा से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • मानसिक शांति व भय से मुक्ति: अनजाना डर, अवसाद और मानसिक तनाव दूर होता है तथा चित्त प्रसन्न रहता है।
  • भावनात्मक संतुलन व स्पष्टता: विचारों में स्पष्टता आती है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है।
  • माता से संबंधों में सुधार: माता के स्वास्थ्य में सुधार होता है और पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है।
  • आत्मविश्वास व सकारात्मकता: जीवन में बार-बार आने वाली अदृश्य रुकावटें समाप्त होती हैं और स्थिरता आती है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: पूजा की शुभ तिथि और समय की जानकारी आपको बुकिंग के बाद व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से दे दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा किसे करानी चाहिए?
उत्तर: जिनकी कुंडली में चंद्र और केतु की युति हो, अथवा जो लोग अत्यधिक मानसिक तनाव, अकारण भय, उदासी, अनिद्रा या भावनात्मक खालीपन का सामना कर रहे हों, उन्हें यह पूजा करानी चाहिए।

Q2. क्या यह पूजा बिना कुंडली के भी करवाई जा सकती है?
उत्तर: यदि आपकी कुंडली उपलब्ध नहीं है लेकिन आपमें ग्रहण दोष के लक्षण (मानसिक अशांति, अकारण डर, नींद की समस्या) स्पष्ट दिख रहे हैं, तो भी यह पूजा कराई जा सकती है।

Q3. क्या मुझे स्वयं पूजा के समय उज्जैन में उपस्थित रहना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, यदि आप स्वयं उज्जैन नहीं आ सकते हैं तो हमारे विद्वान पंडित आपके नाम और गोत्र का व्यक्तिगत संकल्प लेकर आपकी अनुपस्थिति में भी पूरी वैदिक मर्यादा से यह पूजा संपन्न करते हैं।

Q4. पूजा के बाद प्रसाद में क्या भेजा जाता है?
उत्तर: अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद सिद्धवट घाट से अभिमंत्रित प्रसादी, रक्षासूत्र और भस्म आपके दिए गए पते पर कूरियर द्वारा सुरक्षित भेज दी जाती है।

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