कालसर्प दोष ऑनलाइन पूजा

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क्या आप जीवन में लगातार असफलता, मानसिक तनाव, करियर की रुकावटों या स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं? इस वर्ष नाग पंचमी (9 अगस्त) के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित सुप्रसिद्ध सिद्धवट घाट से विशेष ‘कालसर्प दोष ऑनलाइन पूजा’ का आयोजन किया जा रहा है। अवंतिका नगरी में विद्वान आचार्यों द्वारा सिद्ध कल्पवृक्ष (सिद्धवट) के नीचे होने वाली इस शास्त्रीय पूजा में घर बैठे लाइव वीडियो कॉल/लिंक द्वारा सम्मिलित हों और कालसर्प दोष से स्थायी मुक्ति पाएं। विशेष अवसर: नाग पंचमी महापर्व (9 अगस्त) स्थान: सिद्धवट घाट, उज्जैन (कर्क रेखा स्थित सिद्ध कल्पवृक्ष पीठ) समय: प्रातः 08:00 बजे से दोपहर 12:00…

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Description

कालसर्प दोष क्या है और इसका जीवन पर प्रभाव?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष तब निर्मित होता है जब जन्म कुंडली के सभी ग्रह छाया ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं। इस स्थिति के कारण जातक के शुभ ग्रह निष्प्रभावी हो जाते हैं, जिससे जीवन में लगातार स्थायित्व और सफलता का अभाव रहता है। कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को अथक परिश्रम के बावजूद सफलता नहीं मिलती, अकारण मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावटें, वैवाहिक जीवन में अड़चनें और स्वास्थ्य समस्याएं घेरे रहती हैं।


ग्रह शांति या कुंडली पूजा उज्जैन (सिद्धवट घाट) में ही क्यों?

सनातन धर्म में उज्जैन (अवंतिका नगरी) को नवग्रह शांति और दोष निवारण के लिए संपूर्ण पृथ्वी पर सबसे सिद्ध स्थान माना गया है:

  • कर्क रेखा व काल गणना का केंद्र: उज्जैन ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क रेखा पर स्थित है और काल गणना का मुख्य केंद्र है। यहाँ समय के स्वामी भगवान ‘महाकाल’ स्वयं विराजित हैं।
  • सप्तपुरी व सिद्ध क्षेत्र: उज्जैन में एक ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, महाशक्तिपीठ, अष्ट भैरव, जागृत श्मशान और पवित्र शिप्रा नदी का संगम है।
  • सिद्धवट कल्पवृक्ष की महिमा: शिप्रा तट पर स्थित ‘सिद्धवट’ अति-प्राचीन चमत्कारिक कल्पवृक्ष है। इस वट वृक्ष के नीचे की गई पूजा से उग्र से उग्र ग्रह दोष शीघ्र शांत होकर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

नाग पंचमी ऑनलाइन पूजा से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • समस्त बाधाओं का निवारण: करियर, व्यापार, नौकरी और वैवाहिक जीवन की अड़चनें समाप्त होती हैं।
  • मानसिक शांति व भावनात्मक संतुलन: अकारण भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक उन्नति व सफलता: रुका हुआ धन प्राप्त होता है और आय के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं।
  • घर बैठे सिद्ध पूजा का लाभ: बिना यात्रा किए उज्जैन के सिद्धवट घाट की पवित्र ऊर्जा और बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त होती है।

कार्यक्रम विवरण एवं ऑनलाइन पूजा में सम्मिलित होने के नियम

  • तिथि: 9 अगस्त (नाग पंचमी) | समय: प्रातः 08:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
  • स्थान: सिद्धवट घाट, उज्जैन (म.प्र.)
  • लाइव जॉइनिंग: पंजीकरण के पश्चात् आपको पूजा का समय, निर्देश और लाइव लिंक (व्हाट्सएप/ऑनलाइन माध्यम) आपके फोन पर भेजा जाएगा।
  • दिशानिर्देश: निर्धारित समय पर पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर घर पर बैठें और दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए संकल्प व पूजा में भाग लें।

पंजीकरण कैसे करें? (How to Register)

ऑनलाइन पूजा में केवल 21 भक्तों के लिए सीमित स्थान उपलब्ध हैं। समय रहते अपनी बुकिंग सुनिश्चित करें:

  1. वेबसाइट पर ‘Add to Cart’ / ‘Book Now’ पर क्लिक करके अपना स्लॉट चुनें व ₹5100 शुल्क का भुगतान करें।
  2. Order Comment Box में अपना पूरा नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, समय, स्थान और गोत्र अवश्य लिखें।
  3. अधिक जानकारी या सहायता के लिए तुरंत कॉल करें: +91 7201092290

नोट: पूजा पूर्ण होने के पश्चात् अभिमंत्रित रक्षासूत्र, विशेष शिव प्रसादी और बाबा महाकाल की दिव्य तस्वीर कूरियर/पार्सल द्वारा आपके दिए गए पते पर सुरक्षित भेजी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. ऑनलाइन पूजा में मेरी भागीदारी कैसे होगी?
उत्तर: पंजीकरण के बाद आपको व्हाट्सएप पर लाइव लिंक भेजा जाएगा। पंडित जी लाइव वीडियो कॉल के दौरान आपका नाम, पिता का नाम और गोत्र बोलकर संकल्प करवाएंगे और आप घर बैठे संपूर्ण अनुष्ठान देख सकेंगे।

Q2. ₹5100 के शुल्क में क्या-क्या शामिल है?
उत्तर: इस शुल्क में सिद्धवट घाट पर आचार्यों द्वारा की जाने वाली संपूर्ण पूजा सामग्री, पंडित दक्षिणा, ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था और प्रसाद का स्पीड पोस्ट/कूरियर चार्ज शामिल है।

Q3. पूजा के बाद प्रसाद पार्सल में क्या-क्या मिलेगा?
उत्तर: आपके पते पर अभिमंत्रित कालसर्प रक्षासूत्र, सिद्धवट घाट का विशेष प्रसाद और भगवान महाकालेश्वर की सुंदर फोटो भेजी जाएगी।

Q4. क्या नाग पंचमी के दिन ऑनलाइन पूजा उतनी ही फलदायी है?
उत्तर: जी हाँ! उज्जैन की सिद्ध भूमि पर आपके नाम और गोत्र से लिया गया संकल्प और वेदों के मन्त्रोच्चार का प्रभाव पूर्ण शास्त्रोक्त और फलदायी होता है।

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