शुक्र जाप (64000 जप)

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क्या आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह नीच या पीड़ित अवस्था में हैं, कलत्र दोष का निर्माण हो रहा है, अथवा आप विवाह में अत्यधिक विलंब, संबंधों में तनाव, वैवाहिक सुख की कमी, आर्थिक तंगी, आकर्षण में कमी या त्वचा व प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं? वैदिक ज्योतिष में शुक्र देव को प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख, कला, समृद्धि और वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। महाकाल की पावन नगरी अवंतिका (उज्जैन) स्थित अति जाग्रत सिद्धवट घाट (शिप्रा तट) पर 5 वेदज्ञ कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 2 दिनों में 64,000 शुक्र बीज मंत्रों (ॐ ड्रां ड्रीं ड्रौं सः…

Description

शुक्र मंत्र जाप (64,000) क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष और पौराणिक संहिताओं के अनुसार, शुक्र ग्रह जीवन में प्रेम, आनंद, सौंदर्य, आकर्षण, वाहन, भवन और समस्त प्रकार के भौतिक सुखों के स्वामी हैं। जब कुंडली में शुक्र नीच राशि (कन्या) में हों, पाप ग्रहों (राहु, केतु, सूर्य, मंगल) से पीड़ित हों या कलत्र दोष बना रहे हों, तो व्यक्ति का जीवन सुख-सुविधाओं से वंचित होने लगता है। प्रेम और वैवाहिक जीवन में अकारण खटास आ जाती है तथा आर्थिक समृद्धि रुक जाती है। उज्जैन स्थित अति पवित्र सिद्धवट घाट पर 5 विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से 64,000 शुक्र बीज मंत्रों का 2 दिवसीय सस्वर जाप और शांति महाहवन कराने से शुक्र देव की असीम कृपा प्राप्त होती है, संबंधों में मधुरता आती है और जीवन में सुख-वैभव का आगमन होता है।

कुंडली में कमजोर या पीड़ित शुक्र के मुख्य लक्षण:

  • विवाह योग्य आयु होने पर भी विवाह में बार-बार बाधाएं या अत्यधिक विलंब होना।
  • पति-पत्नी के संबंधों में अकारण क्लेश, प्रेम की कमी और तलाक या अलगाव की नौबत आना।
  • निरंतर प्रयास के बाद भी आर्थिक तंगी रहना, धन की बचत न होना और भौतिक सुखों का अभाव।
  • आकर्षण क्षमता, आत्मविश्वास और कलात्मक अभिरुचि में कमी महसूस होना।
  • त्वचा संबंधी रोग, आंखों की दृष्टि में समस्या, या प्रजनन/डायबिटीज संबंधी स्वास्थ्य बाधाएं।

उज्जैन सिद्धवट घाट से ही यह पूजा क्यों कराएं?

उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित काल गणना का मुख्य केंद्र और कालों के देवता भगवान महाकाल की मोक्षदायिनी नगरी है। स्कंद पुराण में वर्णित सिद्धवट घाट पवित्र शिप्रा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन सिद्ध पीठ है, जहाँ की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है:

  • अक्षय कल्पवृक्ष पीठ: सिद्धवट के पावन प्रांगण में की गई ग्रह शांति पूजा, जाप और दान से समस्त मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
  • 5 वेदज्ञ आचार्यों द्वारा 2 दिवसीय जप: उज्जैन के उच्च कर्मकांडी आचार्यों द्वारा 2 दिनों तक विधि-विधान, शुद्ध उच्चारण और लयबद्धता के साथ 64,000 शुक्र मंत्र जप का संपादन।
  • शास्त्रोक्त दान विधान: पूजा के उपरांत शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं (श्वेत वस्त्र, चावल, मिश्री, कपूर, सफेद मिठाई आदि) का विधिवत दान।

अनुष्ठान की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. शास्त्रोक्त संकल्प (Sankalp): यजमान के नाम, पिता के नाम, जन्म विवरण और गोत्र के आधार पर व्यक्तिगत शुक्र दोष निवारण संकल्प।
  2. गणपति व नवग्रह पूजन: विघ्नहर्ता श्री गणेश पूजन, कलश स्थापना एवं नवग्रह मण्डल का विधि-विधान से पूजन।
  3. शुक्र देव आवाहन व ध्यान: भगवान शुक्र का ध्यान, आवाहन एवं षोडशोपचार पूजन।
  4. 64,000 शुक्र मंत्र जाप: 5 विद्वान आचार्यों द्वारा 2 दिनों में “ॐ ड्रां ड्रीं ड्रौं सः शुक्राय नमः” अथवा वैदिक शुक्र मंत्र का सस्वर 64,000 बार पाठ।
  5. शुक्र शांति महाहवन (Havan): गूलर की समिधा, तिल, घी, खीर व विशेष हविष्य से हवन कुंड में आहुतियाँ अर्पण।
  6. दान व पूर्ण आहुति: शुक्र ग्रह की प्रसन्नता हेतु श्वेत वस्तु दान, आरती एवं विप्र दक्षिणा।

इस अनुष्ठान से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • वैवाहिक सुख व प्रेम में वृद्धि: विवाह के मार्ग में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम व सामंजस्य स्थापित होता है।
  • धन, वैभव व समृद्धि: आर्थिक तंगी दूर होती है, आय के नए स्रोत बनते हैं और जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।
  • आकर्षण व आत्मविश्वास: व्यक्तित्व में निखार, आकर्षण क्षमता और समाज में मान-सम्मान एवं लोकप्रियता बढ़ती है।
  • कला व रचनात्मकता में सफलता: अभिनय, संगीत, फैशन, डिजाइनिंग, सौंदर्य उत्पाद व कला क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष उन्नति मिलती है।
  • स्वास्थ्य में सुधार: त्वचा विकार, नसों/प्रजनन संबंधी समस्याओं और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: बुकिंग के पश्चात अनुष्ठान की तिथि, समय और स्थान की पूर्ण सूचना आपको व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या शुक्र जाप (64,000 जाप) ऑनलाइन करवाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, आप घर बैठे यह पूजा ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। हमारे विद्वान पंडित सिद्धवट घाट उज्जैन में आपके नाम-गोत्र का संकल्प लेकर पूरी शास्त्रीय विधि से अनुष्ठान करेंगे।

Q2. क्या मुझे व्यक्तिगत रूप से पूजा में उपस्थित होना होगा?
उत्तर: नहीं, आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। आपकी अनुपस्थिति में पंडित जी आपके नाम और जन्म विवरण से संकल्प लेकर जाप करेंगे, जिससे आपको पूर्ण फल प्राप्त होगा।

Q3. क्या पूजा के बाद फोटो, वीडियो या रिपोर्ट मिलती है?
उत्तर: हाँ, पूजा पूर्ण होने के बाद आपको पूजा रिपोर्ट, संकल्प वीडियो, हवन की फोटो व वीडियो क्लिप भेजी जाती है। साथ ही अभिमंत्रित प्रसादी आपके पते पर भेजी जाती है।

Q4. यह जाप कब करवाना सबसे शुभ रहता है?
उत्तर: शुक्रवार के दिन या शुक्ल पक्ष में शुक्र मंत्र जाप आरंभ कराना सर्वाधिक प्रभावशाली और शुभ माना जाता है।

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