अति महारुद्राभिषेक

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अति महारुद्राभिषेक भगवान शिव को समर्पित अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और उच्चतम फल प्रदान करने वाला वैदिक महाअनुष्ठान है। यह अनुष्ठान सामान्य महारुद्राभिषेक से भी अधिक विस्तृत होता है, जिसमें असंख्य रुद्र मंत्रों के साथ शिवलिंग पर निरंतर अभिषेक किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार अति महारुद्राभिषेक तब कराया जाता है जब व्यक्ति के जीवन में गंभीर ग्रह दोष, दीर्घकालिक रोग, भारी आर्थिक संकट, कानूनी उलझनें, मानसिक अशांति या जीवन की दिशा रुक-सी गई हो। विधि-विधान से संपन्न अति महारुद्राभिषेक भगवान शिव की विशेष कृपा प्रदान करता है और जीवन में असाधारण परिवर्तन, सुरक्षा, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त…

Description

अति महारुद्राभिषेक — अति गंभीर संकट, महादोष और मृत्यु भय निवारण हेतु सर्वोच्च शिव अनुष्ठान

अति महारुद्राभिषेक — क्यों कराया जाता है?

अति महारुद्राभिषेक भगवान शिव की उपासना का सर्वाधिक शक्तिशाली और दुर्लभ अभिषेक माना जाता है।
यह अनुष्ठान केवल उन्हीं परिस्थितियों में कराया जाता है, जब जीवन में अत्यंत गंभीर संकट उत्पन्न हो जाए।

इस अभिषेक में
श्री रुद्रम् (नमकम्–चमकम्) का अनेक बार पूर्ण पाठ,
विशेष वैदिक मंत्रों के साथ
दीर्घकालिक और बहु-द्रव्य अभिषेक किया जाता है।

जब जीवन में

  • मृत्यु भय या गंभीर रोग
  • अति अशुभ ग्रह योग / महादशा
  • बार-बार जीवन संकट
  • व्यापार या परिवार का पूर्ण पतन
  • कालसर्प, ग्रहण, पितृ या महादोष
  • नकारात्मक शक्तियों का तीव्र प्रभाव

चल रहा हो, तब अति महारुद्राभिषेक अंतिम और प्रभावशाली समाधान माना जाता है।

उज्जैन की पावन भूमि पर किया गया यह अनुष्ठान
भगवान महाकाल की सीधी और स्थायी कृपा प्रदान करता है।


अति महारुद्राभिषेक किन परिस्थितियों में किया जाता है?

यह अभिषेक विशेष रूप से निम्न परिस्थितियों में कराया जाता है:

  • जीवन और मृत्यु से जुड़े संकट
  • असाध्य रोग या लगातार ऑपरेशन/दुर्घटना योग
  • ग्रहों की अत्यंत अशुभ महादशा
  • लंबे समय से चल रहा दुर्भाग्य
  • तंत्र बाधा या गहन नकारात्मक प्रभाव
  • परिवार, व्यापार या प्रतिष्ठा का पूर्ण संकट

यह अनुष्ठान शिव कवच और महादोष निवारण का कार्य करता है।


उज्जैन में ही क्यों करें अति महारुद्राभिषेक?

उज्जैन को महाकाल की नगरी और सर्वोच्च शिव साधना की सिद्ध भूमि माना गया है।
यहाँ सिद्धवट घाट पर किया गया अति महारुद्राभिषेक
अत्यंत शीघ्र और निर्णायक फल प्रदान करता है।

  • अनुभवी विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न
  • शास्त्रानुसार अति महारुद्र विधान
  • श्री रुद्रम् (नमकम्–चमकम्) का अनेक बार पाठ
  • पंचामृत, गंगाजल, औषधीय द्रव्यों से दीर्घ अभिषेक
  • नाम-गोत्र सहित विशेष और गुप्त संकल्प
  • शांति पाठ एवं महादेव स्तुति

अति महारुद्राभिषेक से मिलने वाले लाभ

✔ अति गंभीर ग्रह दोषों का शमन
✔ मृत्यु भय और अकाल मृत्यु योग से रक्षा
✔ असाध्य रोगों में राहत
✔ जीवन संकटों से सुरक्षा कवच
✔ नकारात्मक शक्तियों और तंत्र बाधा से मुक्ति
✔ मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक बल
✔ भगवान शिव की विशेष, स्थायी कृपा


अति महारुद्राभिषेक की विधि

अति महारुद्राभिषेक निम्न शास्त्रीय विधि से संपन्न किया जाता है:

  • विशेष संकल्प एवं गणेश पूजन
  • भगवान शिव का दीर्घ आवाहन
  • श्री रुद्रम् (नमकम्–चमकम्) का अनेक आवृत्तियों में पाठ
  • बहु-द्रव्य एवं औषधीय अभिषेक
  • विशेष शांति पाठ एवं शिव आरती

पूरा अनुष्ठान पूर्ण गोपनीयता, वैदिक मर्यादा और उच्च स्तर की साधना के साथ किया जाता है।


अति महारुद्राभिषेक कौन करवा सकता है?

  • जीवन के अति गंभीर संकट से जूझ रहे व्यक्ति
  • मृत्यु भय या असाध्य रोग से पीड़ित
  • अति अशुभ ग्रह योग/महादशा वाले
  • जिनके जीवन में सब कुछ एक साथ बिगड़ रहा हो
  • भगवान शिव की सर्वोच्च कृपा चाहने वाले श्रद्धालु

पूजन की अवधि

लगभग 5 से 6 घंटे
(स्थिति और संकल्प के अनुसार अवधि परिवर्तित हो सकती है)


पूजा बुकिंग के लिए आवश्यक जानकारी

कृपया पूजा बुक करते समय नीचे दिए गए सभी विवरण “Order Comment Box” में अवश्य लिखें

  • Full Name (पूरा नाम)
  • Father’s Name (पिता का नाम)
  • Date, Time & Place of Birth (जन्म तिथि, समय व स्थान)
  • Gotra (गोत्र)

📌 आपको पूजा की तारीख, समय और स्थान की जानकारी अग्रिम रूप से दे दी जाएगी।
📌 सभी अनुष्ठान वैदिक परंपरा और शास्त्रानुसार विद्वान आचार्यों द्वारा सिद्धवट घाट, उज्जैन से किए जाते हैं।
📌 पूजा पूर्ण होने के पश्चात विशेष शिव प्रसादी आपके दिए गए पते पर भेजी जाती है।


अति महारुद्राभिषेक से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अति महारुद्राभिषेक किसे कराना चाहिए?

जिनके जीवन में मृत्यु भय, गंभीर रोग, अति अशुभ ग्रह योग या लगातार बड़े संकट चल रहे हों, उन्हें यह अभिषेक कराना चाहिए।


Q2. अति महारुद्राभिषेक और महारुद्राभिषेक में क्या अंतर है?

महारुद्राभिषेक शक्तिशाली है, जबकि अति महारुद्राभिषेक में रुद्रम् पाठ और अभिषेक की संख्या एवं अवधि कहीं अधिक होती है, इसलिए यह सर्वोच्च स्तर का अनुष्ठान माना जाता है।


Q3. क्या पूजा में मेरा नाम और गोत्र लिया जाता है?

हाँ, पूजा आपके नाम, गोत्र और विशेष (गुप्त) संकल्प के साथ की जाती है।


Q4. क्या मुझे स्वयं पूजा में उपस्थित रहना आवश्यक है?

नहीं। हमारे विद्वान आचार्य आपकी ओर से विधिवत अति महारुद्राभिषेक संपन्न करते हैं


Q5. पूजा के बाद क्या प्राप्त होता है?

पूजा पूर्ण होने के पश्चात विशेष शिव प्रसादी आपके पते पर भेजी जाती है।


Q6. अति महारुद्राभिषेक का प्रभाव कब से दिखाई देता है?

कई श्रद्धालुओं को अनुष्ठान के तुरंत बाद मानसिक और आत्मिक शांति तथा कुछ समय में जीवन संकटों में स्पष्ट राहत अनुभव होती है।


आज ही अति महारुद्राभिषेक बुक करें

जीवन के अति गंभीर संकट, मृत्यु भय और महादोषों से रक्षा के लिए
उज्जैन की पावन भूमि पर विधिवत अति महारुद्राभिषेक कराएँ।

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