राहु केतु शांति पूजा

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क्या आप जीवन में अचानक आने वाले दुखों, लगातार विघ्नों, पारिवारिक उपद्रव या नकारात्मक विचारों से परेशान हैं? ज्योतिषशास्त्र में राहु और केतु को सबसे क्रूर छाया ग्रह माना गया है, जिनके प्रभाव से सूर्य और चंद्रमा भी नहीं बच पाते। यदि आपकी कुंडली में राहु-केतु की अशुभ दशा चल रही है, तो उज्जैन स्थित सुप्रसिद्ध सिद्धवट घाट से विशेष ‘राहु केतु शांति ऑनलाइन पूजा’ कराएं। वेदज्ञ ब्राह्मणों द्वारा 35,000 (17,000 राहु + 18,000 केतु) मंत्रों के जप, नवग्रह पूजन, वैदिक हवन एवं नाम-गोत्र संकल्प के साथ घर बैठे इस पूजा में सम्मिलित हों और अशुभ प्रभावों को शुभता में…

ब्राह्मण भोज

पंडित दक्षिणा

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पूर्वजों की शांति के लिए गंगाजल, तिल और तुलसी पत्र के साथ तर्पण

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Description

राहु केतु शांति पूजा क्यों आवश्यक है? (शास्त्रोक्त व ज्योतिषीय महत्व)

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह एवं अत्यंत क्रूर माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इनके प्रभाव से सूर्य और चंद्रमा पर भी ग्रहण लग जाता है, जिससे उनकी दीप्ति क्षीण हो जाती है। जब किसी जातक की कुंडली में राहु-केतु की अशुभ महादशा, अंतर्दशा या कुप्रभाव निर्मित होता है, तो व्यक्ति का जीवन दुखों और परेशानियों से घिर जाता है। जातक को चारों तरफ से नकारात्मक विचार, अचानक आने वाली गुप्त बाधाएं, भ्रम, मानसिक असंतुलन और पारिवारिक अशांति का सामना करना पड़ता है। आचार्यों द्वारा विधि-विधान से राहु-केतु शांति अनुष्ठान कराने से इन क्रूर ग्रहों की हानिकारक दृष्टि शुभ व लाभदायक प्रभाव में परिवर्तित होने लगती है।

राहु-केतु दोष के मुख्य लक्षण (यदि आप इनका सामना कर रहे हैं):

  • कार्यों में अचानक रुकावटें आना और बनते-बनाते काम अंतिम क्षण में बिगड़ जाना।
  • घर-परिवार में अकारण क्लेश, उपद्रव, तनाव और सदस्यों के बीच सामंजस्य की कमी।
  • संतान प्राप्ति में बाधाएं आना या संतान से जुड़े कष्ट/चिंताएं बने रहना।
  • मन में लगातार नकारात्मक विचार, अनजाना डर, भ्रम और एकाग्रता की भारी कमी।
  • आर्थिक नुकसान, अचानक गुप्त शत्रुओं का बढ़ना और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव।

ग्रह शांति या कुंडली पूजा उज्जैन (सिद्धवट घाट) में ही क्यों?

ज्योतिष शास्त्र और सनातन परंपरा में उज्जैन (अवंतिका नगरी) को संपूर्ण पृथ्वी पर नवग्रह शांति का सबसे मुख्य और सिद्ध केंद्र माना गया है:

  • कर्क रेखा व काल गणना का केंद्र: उज्जैन भौगोलिक और ज्योतिषीय दृष्टि से कर्क रेखा पर स्थित है। यहाँ समय के अधिपति भगवान शिव स्वयं ‘महाकाल’ के रूप में विराजित हैं।
  • अलौकिक सिद्ध क्षेत्र: उज्जैन सप्तपुरियों में से एक है, जहाँ एक ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ, महाशक्तिपीठ, अष्ट भैरव, जागृत श्मशान और मोक्षदायिनी शिप्रा नदी बहती है।
  • सिद्धवट कल्पवृक्ष की महिमा: शिप्रा तट पर स्थित ‘सिद्धवट घाट’ का प्राचीन कल्पवृक्ष अति-चमत्कारिक है। इस सिद्ध वट वृक्ष के नीचे अनुष्ठान कराने से राहु-केतु के उग्र दोष शीघ्र शांत होकर मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

राहु केतु शांति पूजा की प्रामाणिक विधि (Step-by-Step Procedure)

  1. नाम-गोत्र संकल्प व गणेश पूजन: यजमान के नाम, पिता के नाम और गोत्र का शुद्ध उच्चारण कर पूजा का शास्त्रीय संकल्प।
  2. नवग्रह व राहु-केतु आवाहन: नवग्रह मण्डल बनाकर राहु और केतु ग्रह का विशेष आवाहन व पूजन।
  3. 35,000 मंत्रों का जप: योग्य विप्रगणों द्वारा राहु के 17,000 तथा केतु के 18,000 (कुल 35,000) वैदिक व पौराणिक मंत्रों का सस्वर पाठ।
  4. ग्रह शांति महायज्ञ (हवन): राहु-केतु की शांति हेतु निर्धारित समिधाओं, तिल, ज्यों, घृत व औषधियों से विशेष हवन।
  5. शास्त्रोक्त दान व पूर्णाहुति: राहु-केतु के लिए निर्धारित द्रव्यों (जैसे काला तिल, वस्त्र आदि) का दान एवं यजमान के कल्याण हेतु पूर्णाहुति।

इस पूजा से मिलने वाले मुख्य लाभ (Key Benefits)

  • हानिकारक दृष्टि का शुभ प्रभाव में बदलना: राहु-केतु का कष्‍टकारी प्रभाव समाप्त होकर जीवन में अनुकूलता आती है।
  • पारिवारिक सुख व शांति: घर-परिवार में होने वाले क्लेश और उपद्रव कम होते हैं तथा खुशहाली आती है।
  • संतान संबंधी सुख: संतान प्राप्ति के मार्ग की बाधाएं दूर होती हैं और संतान पक्ष से सुख मिलता है।
  • मानसिक एकाग्रता व स्पष्टता: नकारात्मक विचारों का अंत होता है, मन शांत रहता है और निर्णय क्षमता बढ़ती है।

पूजा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण (Checkout के समय Order Note में लिखें):

  1. पूरा नाम (Full Name)
  2. पिता का नाम (Father’s Name)
  3. जन्म तिथि, समय और स्थान (Date, Time & Place of Birth)
  4. गोत्र (Gotra) — (यदि गोत्र ज्ञात न हो, तो ‘कश्यप’ गोत्र से संकल्प लिया जाएगा)

नोट: पूजा की तारीख, समय और ऑनलाइन सम्मिलित होने (लाइव लिंक/वीडियो) की जानकारी आपको बुकिंग के बाद व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा अग्रिम रूप से दे दी जाएगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. राहु-केतु शांति पूजा में कितने मंत्रों का जप किया जाता है?
उत्तर: इस अनुष्ठान में विद्वान विप्रगणों द्वारा राहु ग्रह के 17,000 तथा केतु ग्रह के 18,000 (कुल 35,000) शास्त्रोक्त मंत्रों का विधि-विधान से जप किया जाता है।

Q2. क्या मैं यह पूजा अपने घर से ऑनलाइन करवा सकता हूँ?
उत्तर: हाँ! आप घर बैठे इस पूजा को ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। पूजा के समय आचार्यों द्वारा आपका नाम और गोत्र लेकर संकल्प कराया जाएगा और आप लाइव माध्यम से इसमें सम्मिलित हो सकते हैं।

Q3. क्या मुझे स्वयं उज्जैन में उपस्थित रहना आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, आपकी अनुपस्थिति में भी हमारे विद्वान पंडित आपके नाम और गोत्र का व्यक्तिगत संकल्प लेकर पूरी वैदिक मर्यादा से सिद्धवट घाट पर यह पूजा संपन्न करते हैं।

Q4. पूजा के बाद प्रसाद में क्या प्राप्त होगा?
उत्तर: अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद सिद्धवट घाट से अभिमंत्रित विशेष प्रसादी, रक्षासूत्र और भस्म कूरियर पार्सल द्वारा आपके दिए गए पते पर सुरक्षित भेज दी जाती है।

3 reviews for राहु केतु शांति पूजा

  1. Krishna Gupta –

    Panditji ne pooja ko bahut achhe tareeke se kiya

  2. srishti srivastava –

    The panditji’s guidance during the pooja was invaluable. I’m grateful for the spiritual experience.

  3. Deepak Arora –

    I recommend this pooja to anyone seeking inner peace and spiritual growth. It was truly enlightening.

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