Description
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा — मानसिक शांति, भय निवारण और जीवन में स्थिरता हेतु विशेष अनुष्ठान
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा — क्यों कराई जाती है?
जब कुंडली में चंद्र ग्रह के साथ केतु की युति बनती है, तो इसे चंद्र–केतु ग्रहण दोष कहा जाता है।
चंद्र मन, भावनाएँ और मानसिक संतुलन का कारक है, जबकि केतु वैराग्य, भ्रम, अचानक घटनाएँ और आंतरिक असंतुलन उत्पन्न करता है।
इस दोष के कारण व्यक्ति भीतर से खालीपन, भय और अनिश्चितता महसूस करता है।
ऐसे में उज्जैन की पावन भूमि पर विधिवत चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में आ रही अदृश्य बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
कई बार व्यक्ति को बिना कारण डर लगता है, मन भटकता रहता है और किसी भी कार्य में स्थिरता नहीं बन पाती — यह स्थिति प्रायः चंद्र–केतु ग्रहण दोष का संकेत मानी जाती है।
चंद्र–केतु ग्रहण दोष के कारण जीवन में आने वाली समस्याएँ
यदि कुंडली में चंद्र–केतु ग्रहण दोष हो तो व्यक्ति को निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
- अत्यधिक मानसिक अशांति और भय
- बिना कारण उदासी या अकेलापन
- ध्यान भटकना और निर्णय में असमंजस
- नींद की समस्या और डरावने सपने
- माता से जुड़ी समस्याएँ
- पारिवारिक दूरी और भावनात्मक खालीपन
- करियर में अस्थिरता
- आध्यात्मिक भ्रम या गलत मार्गदर्शन
इन सभी समस्याओं के निवारण हेतु चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
उज्जैन में ही क्यों करें चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा?
उज्जैन को ग्रह दोष निवारण की सिद्ध और पावन भूमि माना गया है।
यहाँ सिद्धवट घाट पर किए गए वैदिक अनुष्ठान शीघ्र और स्थायी फल प्रदान करते हैं।
- अनुभवी विद्वान पंडितों द्वारा शास्त्रानुसार पूजा
- चंद्र और केतु ग्रह के विशेष मंत्र
- नाम-गोत्र सहित संकल्प
- वैदिक हवन, पूर्णाहुति एवं शांति पाठ
हजारों श्रद्धालुओं ने उज्जैन में चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा कर मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता अनुभव की है।
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा से मिलने वाले लाभ
✔ मानसिक अशांति और भय से मुक्ति
✔ मन की स्थिरता और शांति
✔ भावनात्मक संतुलन में सुधार
✔ नकारात्मक विचारों में कमी
✔ माता से संबंधों में सुधार
✔ जीवन में स्पष्टता और दिशा
✔ आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा की विधि
हमारे विद्वान पंडित निम्न वैदिक विधि से पूजा संपन्न कराते हैं:
- संकल्प एवं गणेश पूजन
- चंद्र एवं केतु ग्रह आवाहन
- चंद्र–केतु बीज मंत्र जाप
- वैदिक हवन
- पूर्णाहुति एवं शांति पाठ
पूरी पूजा शास्त्रानुसार, गोपनीयता और श्रद्धा के साथ की जाती है।
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा कौन करवा सकता है?
- जिनकी कुंडली में चंद्र–केतु की युति हो
- मानसिक अशांति, भय या अकेलेपन से परेशान व्यक्ति
- जिनकी नींद और एकाग्रता प्रभावित हो
- माता से जुड़े कष्ट झेल रहे लोग
- जीवन में बार-बार भ्रम और अस्थिरता अनुभव करने वाले
पूजा की अवधि
लगभग 2 से 3 घंटे
पूजा बुकिंग के लिए आवश्यक जानकारी
कृपया पूजा बुक करते समय नीचे दिए गए सभी विवरण “Order Comment Box” में अवश्य लिखें —
- Full Name (पूरा नाम)
- Father’s Name (पिता का नाम)
- Date, Time & Place of Birth (जन्म तिथि, समय व स्थान)
- Gotra (गोत्र)
📌 आपको पूजा की तारीख, समय और स्थान की जानकारी अग्रिम रूप से दे दी जाएगी।
📌 सभी अनुष्ठान वैदिक परंपरा और शास्त्रानुसार विद्वान पंडितों द्वारा सिद्धवट घाट, उज्जैन से किए जाते हैं।
📌 पूजा पूर्ण होने के पश्चात विशेष प्रसादी आपके दिए गए पते पर भेजी जाती है।
चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा किसे करानी चाहिए?
जिनकी कुंडली में चंद्र–केतु की युति हो और मानसिक अशांति, भय या भावनात्मक खालीपन महसूस होता हो, उन्हें यह पूजा करानी चाहिए।
Q2. क्या यह पूजा बिना कुंडली देखे करवाई जा सकती है?
यदि ग्रहण दोष के लक्षण स्पष्ट हों तो पूजा करवाई जा सकती है, लेकिन कुंडली उपलब्ध हो तो अधिक लाभकारी रहती है।
Q3. क्या पूजा में मेरा नाम और गोत्र लिया जाता है?
हाँ, पूजा आपके नाम, गोत्र और संकल्प के साथ की जाती है।
Q4. क्या मुझे स्वयं पूजा में उपस्थित रहना आवश्यक है?
नहीं। हमारे विद्वान पंडित आपकी ओर से विधिवत पूजा संपन्न करते हैं।
Q5. पूजा के बाद क्या प्राप्त होता है?
पूजा पूर्ण होने के पश्चात विशेष प्रसादी आपके दिए गए पते पर भेजी जाती है।
Q6. पूजा का प्रभाव कब से दिखाई देता है?
दोष की तीव्रता के अनुसार कई भक्तों को कुछ ही समय में मानसिक शांति और सकारात्मक बदलाव अनुभव होने लगता है।
आज ही चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा बुक करें
मानसिक अशांति, भय और भावनात्मक असंतुलन से मुक्ति पाकर
उज्जैन की पावन भूमि पर विधिवत चंद्र–केतु ग्रहण दोष पूजा कराएँ।









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